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अंधेरगर्दी: शिक्षक बनने के लिए लगाया यूजीसी नेट का फर्जी प्रमाणपत्र, क्यूआर कोड स्कैन किया तो हुआ बडे़ खेल का खुलासा  

Mon, 13 Jun 2022 10:54 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध निजी कॉलेज की चयन समिति में फर्जीवाड़े के दो मामले सामने आए हैं। शिक्षक बनने के लिए  यूजीसी नेट का फर्जी प्रमाणपत्र लगाया गया। जांच के दौरान जब क्यूआर कोड स्कैन किया गया, तो मामले का खुलासा हो सका।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध निजी कॉलेज श्री गिर्राज महाराज महाविद्यालय, गोवर्धन चौराहा, मथुरा में कंप्यूटर साइंस विषय के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आए अभ्यर्थियों का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। दो अभ्यर्थियों के यूजीसी नेट के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। प्रमाणपत्र पर दिया गया क्यूआर कोड स्कैन करने पर पता चला कि यूजीसी की फर्जी वेबसाइट भी बना डाली गई है। क्यूआर कोड स्कैन करने पर वही फर्जी वेबसाइट खुल रही है। चयन समिति के विशेषज्ञ ने कुलसचिव को मामले की जानकारी दे दी है।

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विश्वविद्यालय के जेपी सभागार में आठ जून को चयन समिति थी। इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के निदेशक प्रो. वीके सारस्वत और कंप्यूटर सेंटर के हेड प्रो. अनिल कुमार गुप्ता विशेषज्ञ के तौर पर शामिल थे। दो अभ्यर्थी विजय प्रकाश मौर्या (निवासी 131, कुंडरिया, मिर्जामुराद, वाराणसी) और अयोध्या प्रसाद (तिवारीपुर, कछांवा, मिर्जापुर) पहुंचे। विशेषज्ञों ने दोनों अभ्यर्थियों से विषय से जुड़े प्रश्न पूछे, अभ्यर्थी प्रश्नों के उत्तर ठीक से नहीं दे पा रहे थे, पाया गया कि उन्हें विषय की जानकारी ठीक से नहीं थी। विजय प्रकाश मौर्या का यूजीसी नेट का रोलनंबर-यूपी1804507153 और अयोध्या प्रसाद का रोलनंबर-73007126था। विशेषज्ञों ने दोनों के प्रमाणपत्रों पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन किया तो पता चला कि प्रमाणपत्र फर्जी हैं। 

क्यूआर कोड स्कैन करने पर खुला मामला

 क्यूआर कोड स्कैन करने पर यूजीसी की पंजीकृत वेबसाइट न खुलकर अन्य फर्जी वेबसाइट खुली, जिसका लिंक ugcnetonlin.in.net खुला। दोनों अभ्यर्थियों से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि उनके यूजीसी नेट के प्रमाणपत्र फर्जी हैं। उनको राजेंद्र नामक व्यक्ति ने फर्जी प्रमाणपत्र देकर साक्षात्कार के लिए भेजा था। कुछ देर में अभ्यर्थी वहां से भाग निकले। प्रो. वीके सारस्वत ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को लिखित में मामले की जानकारी दी है। 

जांच कराने के साथ यूजीसी को दी जाएगी जानकारी

आगरा विवि के प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि‘यूजीसी नेट के फर्जी प्रमाणपत्र लगाए जाने की जांच कराई जाएगी। यूजीसी को भी जानकारी दी जाएगी कि उनकी फर्जी वेबसाइट बनाई गई है। इस तरह के मामले पूरे प्रदेश में निकलेंगे, ऐसे लोग तमाम विश्वविद्यालयों की सेलेक्शन कमेटी में पहुंचते हैं।’ 

चार से पांच अवांछित व्यक्ति प्रत्येक चयन समितियों में दिख रहे

प्रो. वीके सारस्वत ने कुलसचिव को यह भी लिखकर दिया कि यह देखा जा रहा है विश्वविद्यालय की जो भी चयन समितियां हो रही हैं उनको चार से पांच अवांछित व्यक्तियों के माध्यम से कराया जा रहा है। अवांछित व्यक्ति कॉलेजों के प्रबंधतंत्र के साथ आते हैं, अभ्यर्थियों को भी वही लाते हैं, विशेषज्ञों को फर्जी वेबसाइट फर्जी प्रमाणपत्रों का सत्यापन भी कराते हैं। 

संगठित गिरोह कर रहा काम

प्रो. वीके सारस्वत ने संभावना जताई है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति के पीछे संगठित गिरोह काम कर रहा है। जो फर्जी प्रमाणपत्र के साथ फर्जी वेबसाइट तक तैयार कर विषय विशेषज्ञों के समक्ष क्यूआर कोड के माध्यम से फर्जी लिंक दर्शाकर भ्रमित करता है। मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने के साथ यूजीसी, एनटीए और अन्य सरकारी एजेंसियों को प्रकरण से अवगत कराने की मांग रखी है, जिससे वह भी अपने स्तर से जांच कराकर उचित कदम उठा सकें। 

200 कॉलेजों को स्थायी संबद्धता दी जा चुकी है

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर गत दो माह में करीब 200 कॉलेजों को स्थायी संबद्धता दी गई है। कॉलेजों ने चयनित समितियों के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति कराई है। कंप्यूटर साइंस में फर्जी अभ्यर्थियों के पकड़े जाने के बाद सभी स्थायी मान्यताएं भी सवालों के घेरे में हैं। 

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