महाकवि तुलसीदास का गुरुवार को श्रावण शुक्ल सप्तमी पर 512 वां जन्मदिवस है। श्रावण शुक्ल सप्तमी शुक्रवार संवत 1568, एक अगस्त 1511 को कासगंज के शूकर क्षेत्र सोरोंजी के मोहल्ला योग मार्ग में पंडित आत्माराम की पत्नी माता हुलसी ने तुलसीदास को जन्म दिया। रामचरित मानस, सरकारी गजेटियरों व अन्य शोध से स्पष्ट हो चुका है कि सोरोंजी ही तुलसीदास की जन्मभूमि है। इस पर लोगों के अकाट्य प्रमाण हैं, लेकिन इन प्रमाणों के बावजूद प्रदेश सरकार के जिम्मेदार ट्वीट में राजापुर को तुलसी का जन्मस्थान बता रहे हैं।
तुलसी की जीवनी में सदैव सोरोंजी जन्मस्थान छपता रहा
हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र मिश्र ने बताया कि शूकर क्षेत्र सोरोंजी में संत तुलसीदास का जन्म हुआ यह सत्य सभी को मुक्त भाव से स्वीकारना होगा। इस सत्य को छीनने का अधिकार किसी को नहीं होना चाहिए। संत तुलसीदास ने 36 वर्ष की अवस्था में सोरोंजी से प्रस्थान किया और उन्होंने 63 वर्ष की अवस्था तक अयोध्या, प्रयाग, मथुरा, कासगंज आदि स्थानों में भ्रमण किया। 89 वर्ष की अवस्था तक चित्रकूट व यमुना किनारे निवास करते रहे।
"तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक। साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक।।" 16वीं सदी के सर्वश्रेष्ठ कवियों में से एक, ’श्रीरामचरित मानस’ के साथ-साथ हनुमान चालीसा, जानकी मंगल एवं अन्य कई ग्रंथों के अमर रचयिता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्म जयंती पर कोटिशः नमन।
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Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) 3 Aug 2022
"तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक। साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक।।" 16वीं सदी के सर्वश्रेष्ठ कवियों में से एक, ’श्रीरामचरित मानस’ के साथ-साथ हनुमान चालीसा, जानकी मंगल एवं अन्य कई ग्रंथों के अमर रचयिता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्म जयंती पर कोटिशः नमन।
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डॉ. योगेंद्र मिश्र ने बताया कि ब्रिटिशकालीन गजेटियर 1874, 1886, 1908, 1909 सभी में तुलसीदास के बारे में स्पष्ट लिखा है कि अकबर के शासनकाल में सोरोंजी परगना अलीगंज जिला एटा के निवासी यमुना किनारे उस जंगल में आए जहां राजापुर अब स्थित है। सोरोंजी से आकर तुलसीदास ने राजापुर बसाया। सन 1810 में कोलकाता से श्रीरामचरित मानस का प्रथम प्रकाशन हुआ। इसके बाद वैंकटेश्वर मुंबई से प्रकाशन हुआ। तुलसी साहित्य की जीवनी में सदैव सोरोंजी जन्मस्थान छपता रहा है। हिंदी साहित्य का जगत सोरोंजी को ही तुलसीदास का जन्मस्थान मानता है।