ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में सुप्रीम कोर्ट की बंदिशों से छटपटा रहे उद्योग-धंधों की मंगलवार को मुख्यमंत्री की मंडलीय समीक्षा बैठक में अनदेखी हो गई। मंडलभर से मंत्री और विधायक आए लेकिन किसी ने सीएम के समक्ष औद्योगिक गतिरोध दूर कराने की मांग नहीं उठाई। न ही किसी जनप्रतिनिधि ने इस संबंध में कोई चर्चा की। इस पर उद्यमियों ने निराशा जाहिर की।
आगरा के अलावा मथुरा, फिरोजाबाद और भरतपुर तक टीटीजेड है। 14 अक्तूबर 2024 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टीटीजेड में नए उद्योगों की स्थापना और विस्तार पर रोक है। इस वजह से करीब 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रभावित हो रहा है। पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील टीटीजेड में औद्योगिक संगठन रियायत की मांग उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी, गाइडलाइंस का सरलीकरण और प्रोत्साहन की मांग है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयुक्त सभागार में मंडलीय विकास कार्यों और परियोजनाओं की समीक्षा की लेकिन इस समीक्षा बैठक में टीटीजेड की बंदिशों का कोई जिक्र नहीं हुआ। आगरा डेवलपमेंट फाउडेंशन के सचिव केसी जैन का कहना है कि आगरा व आसपास क्षेत्र में पिछले 10 महीने से कोई नया उद्योग शुरू नहीं हो सका। श्रमिकों का पलायन हो रहा है।
लघु उद्योग भारती जिलाध्यक्ष विजय गुप्ता ने कहा कि टीटीजेड से प्रभावित उद्योग-धंधों के कारण उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को छूट की घोषणा करनी चाहिए, जिससे निवेश प्रोत्साहित किया जा सके। उद्यमी राजीव बंसल का कहना है कि ताजमहल के बदले उद्योगों की बलि नहीं चढ़नी चाहिए। बंदिशों के कारण सैकड़ों उद्योग बंद हो गए। उद्यमी पूरन डावर ने भी टीटीजेड में औद्योगिक गतिरोध खत्म करने की मांग की।
अन्य बंदिशों में फंसे यह प्रोजेक्ट
- इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर आईएमसी
- आईओसीएल की मथुरा रिफाइनरी का विस्तार
- जयपुर हाईवे स्थित महुअर का लेदर पार्क
- ताजमहल की डाउन स्ट्रीम में रबर डैम निर्माण