आरपीएफ-जीआरपी के बीच कार्यक्षेत्र को लेकर हुए विवाद में उत्तराखंड के चमौली निवासी दिनेश कुमार पुत्र गब्बर सिंह (28) की जान चली गई। हार्ट पेशेंट को एंबुलेंस में लिटाकर दोनों सुरक्षा एजेंसियां मानवता को भूल करीब एक घंटा अपने कार्य को लेकर उलझी रहीं। इस दौरान यात्री दर्द से बिलखता रहा, लेकिन सिपाहियों को उसकी चीखें सुनाई नहीं दीं। एसएन की इमरजेंसी में उसकी मौत हो गई।
शनिवार को दिनेश (28) कर्नाटक एक्सप्रेस की बोगी संख्या एस-8 की सीट नंबर 68 पर यात्रा कर रहे थे। झांसी निकलते ही उनके सीने में दर्द हुआ। दिनेश ने ट्रेन में स्टाफ को इसकी जानकारी दी। लेकिन ग्वालियर, मुरैना, धौलपुर तक सुनवाई नहीं हुई। जब दिनेश दर्द से कराहने लगे, तो आसपास बैठे यात्रियों ने टीटीई को बुलाया। टीटीई ने आगरा कैंट को कंट्रोल नोट कराया। ट्रेन सुबह साढ़े छह बजे कैंट के प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंच गई। यहां पहले से ही रेलवे डाक्टर ममता शुक्ला टीम के साथ खड़ी थीं। उन्हाेंने स्ट्रेचर मंगाकर आरपीएफ से यात्री को एंबुलेंस में ले जाने को कहा, तो सिपाहियों ने इंकार कर दिया। कुली और रेलवे स्टाफ ने बीमार को स्टेशन के बाहर खड़ी एंबुलेंस में 6.50 बजे लिटा दिया।
जीआरपी भी पहुंच गई। उन्होंने आरपीएफ के सिपाहियों से साथ चलने को कहा, लेकिन आरपीएफ ने इंकार कर दिया। काफी देर तक आरपीएफ-जीआरपी में कार्य क्षेत्र को लेकर विवाद होता रहा। मरीज को 7.20 बजे के बाद जीआरपीकर्मी एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। जहां दिनेश की मौत हो गई। जीआरपी ने शव कब्जे में लेकर पंचनामा भर दिया है। परिजनों को सूचना दे दी है।
बाक्स
बताया जाता है कि दिनेश बंगलूरू के एक होटल में नौकरी करता है। वह छुट्टी पर अपने घर चमौली जा रहा था। दिल्ली से उत्तराखंड के लिए ट्रेन पकड़नी थी। आगरा में दिनेश के गांव का एक व्यक्ति सेना में है। उसे भी घटना की जानकारी पता चल गई। उसने ने भी परिजनों को घटना से अवगत कराया।
वर्जन
सूचना मिलते ही जीआरपी एंबुलेंस के साथ स्टेशन पहुंची। एसएन में भर्ती कराया। आपसी विवाद की जानकारी नहीं। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
गोपेश नाथ खन्ना, एसपी, जीआरपी
-डाक्टरों की टीम समय से पहुंच गई थी। रही बात आरपीएफ-जीआरपी के आपसी विवाद की, तो जांच कराई जाएगी। दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भूपेंदर ढिल्लन, जनसंपर्क अधिकारी, आगरा रेल मंडल