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जीएसटी: टैक्स पूरा, फिर भी जुर्माना क्यों?, व्यापारियों ने वित्त मंत्री तक पहुंचाई शिकायत, रखीं बड़ी मांगें

Tue, 28 Jul 2026 11:34 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने जीएसटी अधिकारियों पर नियमों की मनमानी व्याख्या और व्यापारियों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों ने जुर्माने की व्यवस्था, छोटे कारोबारियों के जीएसटी पंजीकरण और रिफंड प्रक्रिया समेत कई नियमों में बदलाव की मांग की।
 
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जीएसटी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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आगरा उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, महानगर ने प्रदेश के उद्यमियों और व्यापारियों की समस्याओं पर नाराजगी जताई है। प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री को संबोधित एक मांगपत्र जीएसटी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त (ग्रेड-1) पंकज गांधी को सौंपा।
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महानगर अध्यक्ष नरेश पांडेय एवं कोषाध्यक्ष सुरेश लवानिया के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में व्यापारियों ने जीएसटी अधिकारियों पर नियमों की मनमर्जी से व्याख्या करने, बेवजह उत्पीड़न करने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है। व्यापारियों की प्रमुख मांगों में सचल दस्तों की ओर से तकनीकी या मानवीय भूलों के आधार पर जुर्माना वसूलने पर तुरंत रोक लगाना शामिल है।

उन्होंने मांग की है कि जब पूरा टैक्स जमा हो, तो गाड़ी रोककर जुर्माना न लगाया जाए। इसके अलावा 40 लाख रुपये से कम टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को जबरन जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए बाध्य करने पर रोक लगाने और एसआईबी जांच या सर्वे के समय व्यापारियों से दबाव बनाकर टैक्स जमा न कराने की मांग की गई। व्यापारियों ने तैयार माल और कच्चे माल की जीएसटी दरों में विषमता जैसे कागज पर 18% और कार्डबोर्ड पर 5% को दूर करने, तंबाकू एवं तंबाकू पत्ते के कर अंतर को समाप्त करने पर भी जोर दिया। इस अवसर पर अरुण गुप्ता, कपूर चंद रावत, संजय गुप्ता, जयदीप सोनकर, रामकुमार अग्रवाल, संतोष गुप्ता, उस्मान अगाई, पंकज अग्रवाल, रियासत अली व अन्य मौजूद रहे।
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इन मांगोें पर भी रहा जोर
- पंजीकृत व्यापारियों को किसी भी कारण से मृत्यु की स्थिति में 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा दिया जाए।
- जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों को निशुल्क लैपटॉप व सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया जाए।
- विलंब भुगतान पर ब्याज दर 18% से घटाकर 6% की जाए तथा दंडात्मक प्रावधानों में जेल की सजा को खत्म कर इसे केवल आर्थिक दंड तक सीमित रखा जाए।
- रिटर्न फाइल होते ही रिफंड की राशि आयकर की भांति सीधे खाते में भेजी जाए और देरी होने पर 18% ब्याज दिया जाए।
- ट्रांसपोर्टर की ओर से ट्रक बदलने पर ई-वे बिल-2 जनरेट होने पर विभाग द्वारा इसे डबल सेल मानकर टैक्स लगाने की व्यवस्था पर रोक लगे।
- पैकिंग मैटेरियल पर अधिक जीएसटी दर होने की स्थिति में अंतर की राशि का भुगतान सीधे व्यापारी के खाते में ट्रांसफर किया जाए।
 
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