पिछले सात महीने में 500 मोबाइल गुम या चोरी हो चुके हैं। इनमें से आधे ही पुलिस बरामद कर सकी है। बाकी कहां गए, यह किसी को नहीं पता? जिन लोगों से मोबाइल बरामद होते हैं, वह यही कहते हैं कि सड़क पर मिला तो किसी से खरीदा था।
कमला नगर निवासी विशाल वर्मा बीएसएसएन के एसडीओ हैं। उनकी पत्नी 14 फरवरी को प्रतापपुरा आईं थीं। यहां पर बस में बैठ रही थीं। तभी उनका मोबाइल गुम हो गया था। उन्होंने पुलिस से शिकायत की। मोबाइल की कीमत तकरीबन 18 हजार रुपये थी। पुलिस ने जांच की। मोबाइल बरामद हो गया।
मोबाइल को मैनपुरी के एक दंपती चला रहे थे। वो पुलिस के पास आकर मोबाइल दे गए। उन्होंने बताया कि एक ऑटो से कहीं जा रहे थे। तभी ऑटो चालक ने कहा कि वो काफी गरीब है। लॉकडाउन की वजह से काम नहीं मिल रहा है। परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। बिल और डिब्बा है। मोबाइल को बेचकर घर का खर्च चलाएंगे। दंपती ने 5200 रुपये में मोबाइल ले लिया। उन्हें नहीं पता था कि मोबाइल गुम हुआ है।
पुलिस की मोबाइल रिकवरी सेल का कहना है कि ज्यादातर मोबाइल में लॉक लगा होता है। इसे दुकानदार मैकेनिक खोल देते हैं। मगर, इसके लिए बिल और डिब्बा देखना आवश्यक है। मगर, कुछ दुकानदार अवैध रूप से यह काम कर रहे हैं। मोबाइल का लॉक खोलने के लिए पूरा मोबाइल रीसेट किया जाता है।
इससे कॉन्टेक्ट चले जाते हैं। सॉफ्टवेयर भी नया डाला जाता है। अधिकतर मोबाइल को चलाया नहीं जाता है। इस वजह से बरामद नहीं हो पाते हैं। कई बार चोरी गए मोबाइल को चोर दुकानदारों को बेचते हैं। वो मोबाइल को आन नहीं करते हैं। उनकी टचस्क्रीन, आईसी, कवर, स्पीकर आदि सामान को बेच देते हैं। इससे अच्छी कीमत मिल जाती है।
एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने कहा कि गुम हुए मोबाइल बरामद करने के लिए रिकवरी सेल को लगाया गया है। अधिकतर मोबाइल बरामद किए जा चुके हैं। अब और मोबाइल भी बरामद किए जाएंगे। मोबाइल मिलने से लोगों को राहत मिलती है। कई लोगों ने सड़क पर मिले मोबाइल का प्रयोग शुरू कर दिया था।