आगरा। ताजमहल के पूर्वी गेट से चंद कदम दूर आकार ले रहे छत्रपति शिवाजी म्यूजियम में शिवाजी के शौर्य और साहस की गाथा के साथ सूबे के इतिहास, उत्सव, नदियों से पर्यटक रूबरू होंगे। इसके लिए यहां 14 गैलरी बनेंगी। सबकी अलग-अलग थीम होगी।
जनवरी तक आगरा आने वाले पर्यटकों को इस म्यूजियम की सौगात मिल सकती है। इसका ढांचा खड़ा हो चुका है। फिनिशिंग कार्य भी अंतिम चरण में है। अब थीम आधारित गैलरी का कार्य शुरू होगा। करीब 80 करोड़ रुपये 14 गैलरी की लागत आएगी। गैलरी में सूबे की संस्कृति, आस्था, अध्यात्म, अर्थव्यवस्था, स्वाद और उत्सव से पर्यटक रूबरू हो सकेंगे। इस म्यूजियम की नींव 2016 में सपा सरकार में रखी गई थी।
मुगल म्यूजियम नाम से इसका निर्माण शुरू हुआ था लेकिन 2020 में सीएम योगी आदित्यनाथ ने नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी म्यूजियम कर दिया। 2025 में फिर इस म्यूजियम पर काम शुरू हुआ। संस्कृति विभाग अब इसे छत्रपति शिवाजी म्यूजियम के स्वरूप में विकसित कर रहा है।
संस्कृति विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नए साल में इस म्यूजियम को शुरू करने की योजना है। सीएम के सामने हुए प्रेजेंटेशन में इसको अंतिम रूप दिया जा चुका है। म्यूजियम में 14 गैलरियां बनेंगी। इसमें कुछ गैलरी शिवाजी की जीवनगाथा और कुछ प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाएंगी। इसके अलावा ओरिएंटेशन और 7डी थिएटर जैसी गैलरियां होंगी। म्यूजियम के बनने के बाद दर्शक केवल ताजमहल तक केंद्रित न होकर एक नए आकर्षण से जुड़ेंगे।
उत्सवों के संगीत से जोड़ेगी इंटरैक्टिव गैलरी
- म्यूजियम में इंटरैक्टिव (संवादात्मक) गैलरी बनेगी, जो आगंतुकों को उत्सव के संगीत से जोड़ेगी। साथ में फेस्टिवल फोटो बूथ होगा। जहां प्रमुख त्योहारों के बैकड्रॉप के साथ तस्वीर खिंचवाई जा सकेगी। दीवारें रंगों के छीटों से रंगी होंगी। एक उत्सव शुभकामना दीवार भी होगी जहां वर्चुअल माध्यम से दीप से लेकर रंगोली तक बनाई जा सकेगी।
यह होगी गैलरियों की थीम
- अग्रदूतों से होंगे रूबरू: इस खास गैलरी में प्रदेश के महापुरुषों, स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर साहित्य, कला, विज्ञान, खेल क्षेत्रों के प्रमुख चेहरों का विवरण होगा।
- नदियां दिखाएंगी रास्ता: यह खुली गैलरी होगी जिसमें गंगा, यमुना, सरयू व अन्य नदियों का पारिस्थितिकी तंत्र, आर्थिक प्रभाव, आध्यात्मिक महत्व का चित्रण होगा।
- युगों-युगों से उत्तर प्रदेश: इस गैलरी में प्रदेश का पुरापाषण से लेकर वैदिक काल, रामायण, महाभारत कालीन समय दर्शाया जाएगा।
- हर स्वाद का रंग: यह गैलरी 175 वर्ग मीटर में बनेगी। धार्मिक कार्यों व त्योहारों में बनने वाले व्यंजन से गलियों के चटकारे तक अंकित होंगे।
- उत्सव और पर्व- इस गैलरी में बरसाना की होली, देव दीपावली, प्रयागराज महाकुंभ से लेकर प्रदेश के अन्य प्रमुख मेलों की झलक।
अध्यात्मिक भूमि: इस गैलरी में हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख सहित अन्य धर्मों के प्रतीकों, परंपराओं की झलक दिखेगी।
सांस्कृतिक विरासत: ब्रज, पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड की अलग-अलग सांस्कृतिक गैलरी के साथ ही आगरा व वाराणसी गैलरी अलग से दिखेगी।
- सूबे के शिल्प: इस गैलरी में प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के शिल्प व प्रमुख उत्पाद दिखाई देंगे। एक परिधान कार्नर होगा।