मुगलिया शहर में तीन-तीन म्यूजियम, लेकिन प्रदेश सरकार के अफसरों को एक और म्यूजियम चाहिए। नाम मुगल म्यूजियम तो दे दिया और 141.89 करोड़ रुपये का बजट भी हासिल कर लिया, लेकिन मुगल म्यूजियम में एंटिक्विटी क्या रखेंगे और पर्यटक कैसे पहुंचेंगे, यह न नोडल एजेंसी पर्यटन विभाग के अफसरों को पता है और न ही सरकार को। ताजमहल के अंदर मौजूद म्यूजियम में ताज के 65 लाख पर्यटकों के उलट महज 5.80 लाख पर्यटक पहुंचते हैं। अफसरों का फोकस केवल इमारत के निर्माण पर बजट को बढ़ाने पर है।
मुगल म्यूजियम का प्रस्ताव 2 जुलाई 2015 को 129.66 करोड़ रुपये था, लेकिन मुख्यमंत्री ने तीन दिन पहले शिलान्यास किया तो यह म्यूजियम बढ़कर 141.89 करोड़ रुपये का हो गया। ताजगंज प्रोजेक्ट की तरह बनते-बनते इसका बजट और भी बढ़ जाएगा। पर्यटन उद्योग का मानना है कि शहर में ताजमहल, फतेहपुर सीकरी और पालीवाल पार्क के मौजूदा म्यूजियम को ही अपग्रेड करके म्यूजियम निर्माण पर खर्च होने वाली रकम पर्यटन विकास में लगाई जा सकती थी, जो पर्यटकों को आकर्षित करती। ताजमहल के अंदर बने म्यूजियम से ही पर्यटकों का मोहभंग है तो 1300 मीटर दूर मुगल म्यूजियम में कौन आएगा, जिसके लिए अब तक एंटिक्विटी तक लोन पर नहीं ली गईं। नेशनल म्यूजियम के पास भी मुगलिया इतिहास से जुड़े इतनी कृतियां नहीं हैं जो विशाल म्यूजियम में डिस्प्ले की जा सकें।
इतिहास का खजाना, फिर भी सैलानी नहीं
ताज म्यूजियम
1905 में लार्ड कर्जन ने ताजमहल के अंदर मुख्य प्रवेश द्वार पर बने दो कमरों में ताज म्यूजियम की शुरूआत कराई, लेकिन 18 सितंबर 1982 में यह मौजूदा पश्चिमी जलमहल (नक्कारखाना) में शिफ्ट कर दिया गया। यहां तीन गैलरी में 121 एंटीक्विटी रखी गई हैं। इनमें से 78 डिस्प्ले किए गए हैं जबकि 43 रिजर्व में रखे गए हैं। यहां मुगल बादशाहों के शाही फरमान, राजा जयसिंह का बनाया हुआ ताज का नक्शा, पांडु़लिपियां हैं।
ये है खास ताज म्यूजियम में
- फिरदौसी के शाहनामा के दो पेज
- 1612 की चहल मजलिस की पांडुलिपि
- हाथीदांत से बना मुमताज महल-शाहजहां का चित्र
- ताज का भू-विन्यास तथा बागीचों की योजना
- राजा जयसिंह को शाहजहां द्वारा भेजे गए फरमान
- ताज के लिए मकराना पत्थर मंगवाने संबंधी फरमान
- मुगलिया दौर के सोने के सिक्के तथा कीमती थालियां
- दाराशिकोह, शाहशुजा की पर्शियन लिखावट के नमूने
फतेहपुर सीकरी- अकबर की राजधानी में दीवान ए खास के पास एएसआई ने म्यूजियम बनाया है जो दो साल पहले ही शुरू किया। यहां वीर छबीली टीले के उत्खनन से प्राप्त जैन मूर्तियां प्रदर्शित की गई हैं। मुगलिया काल के सिक्कों की प्रदर्शनी के साथ सीकरी के इतिहास से जुड़ी वीडियो भी यहां दिखाई जा रही है। महज एक करोड़ रुपये में शुरू किए गए म्यूजियम में दुर्लभ प्रतिमाएं हैं, लेकिन एक लाख से कम पर्यटक ही हर साल इस म्यूजियम को देखने पहुंचते हैं, जबकि यहां भी ताज म्यूजियम की तरह प्रवेश नि:शुल्क है।
ताज म्यूनिसिपल म्यूजियम, पालीवाल पार्क
साल 2010 में तत्कालीन नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय और मेयर अंजुला सिंह माहौर ने जोंस लाइब्रेरी पालीवाल पार्क में म्यूजियम शुरू कराया। यहां आगरा और मथुरा से मिलीं कई प्रतिमाएं और ब्रिटिश कालीन प्रतिमाओं को भी रखवाया गया। पुरातत्व दस्तावेजों को भी यहां प्रदर्शित किया गया है।