आगरा के पर्यटन उद्यमियों ने मांग की है कि ताजमहल पर एलईडी लाइटिंग कर रात 11 बजे तक खोला जाए, जिससे देश और दुनियाभर के सैलानियों के लिए एक नया आकर्षण बढ़े और लोग ताजमहल को दूधिया रोशनी में देखने के लिए खिंचे चले आएं। इसकी जरूरत इसलिए है, क्योंकि 118 दिन बंद रखने के बाद खोले गए ताज को देखने के लिए सैलानी कम आ रहे हैं।
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ताजमहल का नाइट व्यू
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना के कारण देश और दुनियाभर के सैलानी ताजमहल से दूर हैं। ताजमहल पर कोरोना से पहले जितने पर्यटक महज दो दिन में आया करते थे, उतने एक महीने में भी नहीं आए हैं। इसका असर पर्यटन उद्योग से जुड़े चार लाख लोगों पर पड़ रहा है। ताज को रात में खोले जाने की मांग सांसद एसपी सिंह बघेल ने भी उठाई है।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
एएसआई से सेवानिवृत्त वरिष्ठ संरक्षक डॉ. आरके दीक्षित ने बताया कि ताजमहल पर 1996 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह के सामने डेमो किया गया था। यह ताज को रात में खोले जाने के लिए था। इसके बाद वर्ष 1997 में यान्नी के शो में लाइट से कीड़े आने के बाद एक्सपर्ट की रिपोर्ट आई और उसके बाद लाइटिंग की कोशिश बंद हो गई। तब से लेकर अब तक कई सरकारों के केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों ने लाइटिंग के धूल फांकते प्रस्तावों को निकलवाया लेकिन उसे अमल में नहीं ला सके।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
चार स्मारकों को रात में जगमगाने का प्रस्ताव
संस्कृति मंत्रालय ने एनबीसीसी और वाप्कोस कंपनियों को देश के 25 स्मारकों पर रोशनी करने, इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाने का प्रस्ताव दिया था। इसमें आगरा के चार स्मारक ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी और अकबर का मकबरा शामिल हैं। ताजमहल को रात में एलईडी की रोशनी में जगमगाने के प्रस्ताव पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने आपत्ति लगाई है।
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सुनहरा ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
1945 में अमेरिकी फौज ने ताज पर डाली थी फ्लड लाइट
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1945 में अमेरिकी फौज के जवानों ने ताज में वीई डे (विक्टरी इन यूरोप) मनाया था, उस दौरान ताजमहल पर फ्लड लाइटों से रोशनी डाली गई थी। आजादी से पहले उत्तर भारत के सर्किल सुपरिटेंडेंट रहे एमएस वत्स ने अपनी रिपोर्ट में ताजमहल पर लाइटिंग के बारे में जानकारी दी है। उनकी रिपोर्ट में ताज पर विश्व युद्ध के दौरान मुख्य गुंबद पर बंधीं बल्लियों की पाड़ और ताज पर अमेरिकी फौज के रोशनी करने की तस्वीरें भी दी गई थीं।
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मार्च 1997 में म्यूजिक कंसर्ट के दौरान तक ताजमहल पर डाली गई दूधिया रोशनी
- फोटो : अमर उजाला
यान्नी के शो के लिए रंगीन रोशनी में नहाया था ताज
20 से 24 मार्च, 1997 तक ताजमहल के पीछे ग्यारह सिड्डी स्मारक के पास प्रसिद्ध यूनानी संगीतकार यान्नी ने शो किया था, जिसमें वहीं से ताज पर चार दिनों तक रंगबिरंगी फ्लड लाइटों से रोशनी डाली गई थी। उस दौर में ताजमहल पर रंगीन लाइटिंग की तस्वीरों ने दुनियाभर में ऐसा जादू चलाया कि उसके बाद से ताजनगरी में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ती चली गई।
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20 से 24 मार्च 1997 में म्यूजिक कंसर्ट के दौरान तक ताजमहल पर डाली गई दूधिया रोशनी
- फोटो : अमर उजाला
सारेगामापा शो में आखिरी बार जगमगाया ताज
यान्नी के शो के दो साल बाद वर्ष 1999 में तब टीवी के प्रसिद्ध शो ‘सारेगामापा’ के फाइनल को ताजमहल के पीछे स्टेज बनाकर शूट किया गया था। भारतीय पर्यटकों में ताजमहल को लेकर उसके बाद क्रेज नजर आया।
पर्यटन उद्योग की जान में आ जाएगी जान
टूरिज्म गिल्ड ऑफ आगरा के अध्यक्ष राजीव सक्सेना ने कहा कि हमने केंद्रीय संस्कृति मंत्री से ताज को रात में दिखाने के लिए मांग की है। ताज के अंदर न सही, महताब बाग से ही ताज को दिखाया जा सकता है। एलईडी और नई तकनीक से ताज को कृत्रिम प्रकाश में दिखाया जाए, इससे नाइट स्टे तो बढ़ेगा ही, पर्यटन उद्योग को चार चांद लग जाएंगे।
पर्यटक होंगे आकर्षित
सांसद प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने कहा कि कोरोना के कारण पर्यटन उद्योग बेहाल है इसलिए ताजमहल को एलईडी की रोशनी में रात 11 बजे तक खोला जाए। इससे दुनिया भर के पर्यटक ताजमहल के प्रति आकर्षित होंगे और पर्यटन उद्योग फिर से रफ्तार भरने लगेगा।
रात में रुकेंगे पर्यटक
आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के अध्यक्ष प्रह्लाद अग्रवाल ने कहा कि कोरोना के बाद ताजमहल खुल तो गया है लेकिन इसे देश और दुनिया के पर्यटकों के लिए ऐसा आकर्षण का केंद्र बनाना होगा जिससे लोग खिंचे चले आएं। रात में लाइटिंग के जरिए यह आकर्षण बढ़ाया जा सकता है। इससे पर्यटक रात में रुकेंगे।
नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत
होटल एंड रेस्टोरेंट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश वाधवा ने कहा कि कुतुब मीनार समेत देश के 10 स्मारकों को रात में रोशन किया गया है। कोरोना के बाद हमें नए सिरे से पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनीति बनानी होगी। इसके लिए सबसे पहले ताजमहल को दूधिया रोशनी में खोलना होगा।