श्रावण मास के दूसरे सोमवार को बल्केश्वर महादेव का मेला लगेगा। उद्घाटन रविवार शाम को पांच बजे होगा, जिसके साथ महापरिक्रमा का सिलसिला शुरू होगा जो कि सोमवार दोपहर तक चलेगा। लाखों की संख्या में भोले बाबा के भक्त नंगे पैर शहर के चारों कोनों पर बने शिवालयों में भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करेंगे।
बल्केश्वर महादेव मंदिर के महंत कपिल नागर और सुनील नागर ने बताया कि परिक्रमा 31 जुलाई (रविवार) शाम से शुरू होगी। श्रद्धालु राजेश्वर, पृथ्वीनाथ, कैलाश महादेव और बल्केश्वर महादेव का जलाभिषेक करेंगे। उन्होंने बताया कि मंदिर के कपाट सोमवार को सुबह करीब चार बजे खुलेंगे। पहले बाबा बिल्वकेश्वरनाथ (बल्केश्वर) जी की मंगला आरती होगी। इसके बाद जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक कर पूजन किया जाएगा। सुबह से परिक्रमार्थियों के आने तक जलाभिषेक की प्रक्रिया चलती रहेगी। श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में मेवे के दूध का प्रसाद वितरित किया जाएगा। शाम छह बजे से बाबा का दिव्य, मनमोहक फूल बंगला सजाया जाएगा। अद्भुत शृंगार आरती होगी। रात दस बजे महाआरती के बाद 12 बजे पट बंद कर दिए जाएंगे।
लाठी, डंडों पर लगाया प्रतिबंध
बल्केश्वर महादेव की परिक्रमा में उमड़ने वालों में अधिकांश श्रद्धालु नौजवान होते हैं। कई तरह के भेष बनाकर, कमर में घंटियां, हाथ में लोटा और डंडा लेकर चलते हैं। सड़कों पर परिक्रमार्थियों का रेला रहता है। पिछले कुछ वर्षों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं। वाहनों, होर्डिंग, ग्लोसाइन, ट्री गार्ड आदि तोड़ने की घटनाएं देखते हुए प्रशासन ने लाठी-डंडों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस दौरान शहर की ट्रैफिक व्यवस्था डायवर्ट रहेगी। शनिवार को एडीएम सिटी के नेतृत्व में अधिकारियों ने परिक्रमा मार्ग का दौरा किया। शाम को पुलिस लाइन बैठक कर परिक्रमा को शांतिपूर्ण संपन्न कराने की रणनीति बनी।
गड्ढे लेंगे भोले की भक्तों की परीक्षा
बारिश की वजह से शहर में सड़कों का बुरा हाल है। पूरे परिक्रमा मार्ग पर गड्ढे हो रहे हैं और गिट्टियां उखड़ रही हैं। ऐसे में नंगे पैर परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन की लापरवाही के चलते गड्ढे नहीं भरे जा सके हैं। हालात यह हैं कि बल्केश्वर मंदिर के पास की सड़क दुरुस्त नहीं हो सकी है। कुछ स्थानों पर पैच वर्क किया गया है लेकिन वहां बिछी गिट्टियां भी परेशान करेगी।
जगह-जगह लगेंगे भंडारे
परिक्रमार्थियों के स्वागत में पूरा शहर उमड़ पड़ता है। पूरे परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह पानी, शर्बत की प्याऊ लगेंगी। भंडारों का आयोजन होता है। कहीं पू़ड़ी सब्जी होगी तो कहीं चाट पकौड़ी के साथ कई प्रकार के व्यंजन। परिक्रमार्थियों का जोश बढ़ाने के लिए तेज म्यूजिक के बीच पानी की बौछार की जाती है। शनिवार दोपहर से ही जगह-जगह भंडारों की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
5241 वर्ष पुराना परिक्रमा का इतिहास
पंडित दिनेश गुरू की मानें तो बल्केश्वर महादेव की परिक्रमा का इतिहास कृष्ण काल से है। 5241 वर्ष पूर्व भगवान भोलेनाथ गोकुल में बाल कृष्ण के दर्शन के लिए पधारे थे। पहले उन्होंने मनोकामना की तो मनकामेश्वर बाबा के नाम से प्रतिष्ठित हुए। गोकुल दर्शन करने के लिए कई रूप धारण किए मैया से पूछा कि किस रूप में दर्शन कराएगी जब राजा के रूप में राजेश्वर नाथ, फिर पृथ्वीनाथ और पर्वत स्वरूप में कैलाश महादेव और अंत में बलधारी बल्केश्वर नाथ बने। पंडित अक्को गुरू ने बताया समय-समय पर नाम, मंदिर की संरचना बदलती रही।