आगरा में रविवार को कोरोना वायरस के तीन नए मामले सामने आए हैं। जनपद में अब तक कुल 10, 548 मरीज मिले हैं, जिनमें से 10, 355 मरीज ठीक हुए हैं। जनपद में 174 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। वहीं अब सक्रिय मरीजों की संख्या 19 रह गई है। डीएम प्रभु एन सिंह ने बताया कि आगरा जनपद में 5, 77,009 सेंपल टेस्ट हो चुके हैं। रिकवरी रेट 98.17 प्रतिशत है। गौरतलब है कि आगरा में विगत 2020 मार्च में पहला कोरोना संक्रमित मिला था। इसके बाद लगातार कोरोना संक्रमण के मरीज मिलना शुरू हुए।
दिसंबर में बदली कहानी, मॉडल सफल
दिसंबर में आगरा मॉडल सफल हो गया। इसे अन्य जिलों में लागू किया गया। कारण यह था कि दिसंबर से संक्रमण की दर तेजी से घटी। इसका एक कारण होम आइसोलेशन भी रहा। होम आइसोलेशन में 6502 मरीज भर्ती रहे और ठीक हुए। इनमें से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई। अभी 18 मरीज होम आइसोलेेशन में इलाज करा रहे हैं।
तब से अब तक
03 मार्च: खंदारी निवासी जूता कारोबारी का परिवार संक्रमित हुआ।
07 मार्च: एसएन कॉलेज में आगरा कैंट निवासी युवती भर्ती हुई।
16 मार्च: संक्रमण को मात देकर कारोबारी के बेटे डिस्चार्ज हुए।
07 अप्रैल: कमला नगर निवासी 76 साल की वृद्धा की हुई मौत।
20 अप्रैल: संक्रमित गर्भवती महिला का प्रसव कराया गया।
23 अप्रैल: डॉ. आरके सिंह ने प्लाज्मा दान किया।
16: जनवरी: कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गई।
05 फरवरी: एसएन कॉलेज का कोविड अस्पताल हुआ खाली।
ऐसे बनीं चेन
1. पहली चेन मार्च 2020 में विदेश से लौटे लोगों की बनी।
2. दूसरी चेन जमात से लौटे लोगों की थी, यह अप्रैल में बनी थी।
3. तीसरी चेन अप्रैल-मई में बनी, यह स्वास्थ्यकर्मियों की थी।
4. चौथी चेन मई और जून में सामने आई, यह चिकित्सकों की थी।
5. पांचवीं चेन पुलिसकर्मियों की थी, यह जून और जुलाई में बनी।
6. छठी चेन थी सब्जी वालों और दूध वालों की, ये जून से अगस्त में बनी।
7. सातवीं चेन मेडिकल स्टोर संचालकों की थी, यह अगस्त से अक्तूबर तक रही।
8. आठवीं और आखिरी चेन अक्तूबर और नवंबर में बनी, यह व्यापारियों की थी।