आगरा। टाइगर अभी जिंदा है, लेकिन यह बाॅलीवुड फिल्म का हीरो नहीं, दस्यु सरगना निर्भय गुर्जर के गिरोह का बदमाश है। पुलिस ने अपहरण के मामले में 23 साल से फरार आरोपी टाइगर उर्फ बबलू उर्फ जितेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पांच राज्यों में नाम बदलकर वह फरारी काटता रहा। कभी ट्रक चालक तो कभी मजदूर बना। वह अपहरण की एक और वारदात को अंजाम देने आया था तभी डाैकी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। वारदात के समय उसकी उम्र 28 साल थी। अब वह 51 साल का है।
डीसीपी पूर्वी जोन सैय्यद अली अब्बास ने बताया कि वर्ष 2002 में पिढाैरा थाना क्षेत्र के रहने वाले ट्रक चालक 18 वर्षीय हरिओम का अपहरण कर 11.50 लाख रुपये की फिराैती मांगी गई थी। अपहरण निर्भय गुर्जर गैंग ने किया था। उसे बीहड़ में ले जाकर रखा था। पुलिस ने वारदात में शामिल नेकराम और दाऊजी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस की पड़ताल में कानपुर देहात के थाना गजनेर स्थित सैंथा निवासी टाइगर का भी नाम सामने आया था। पुलिस ने उसकी तलाश की मगर वो घर बेचकर परिवार सहित फरार हो गया।
उसकी तलाश में कई बार टीम गई, लेकिन पता नहीं चल सका। गांव के लोग भी कुछ नहीं बताते थे। उस पर सबसे पहले 500 रुपये का इनाम घोषित हुआ। कोर्ट से वारंट भी जारी हुए। बाद में उसके ट्रांसफर वारंट जारी हुए। इसमें आरोपी की फाइल बंद कर दी जाती है मगर वो फाइलों में जिंदा रहता है। उस पर हाल ही में 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था इसलिए पुलिस टीम को उसकी तलाश थी। रविवार रात को उसे डाैकी पुलिस ने नगला देवहंश के पास गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की मुठभेड़ में मारा गया था सरगना
डीसीपी ने बताया कि 2000 के दशक में अपहरण की घटनाएं चरम पर थीं। दस्यु गिरोह अपहरण के बाद लोगों को बीहड़ में लेकर जाते थे। पुलिस को भी कई दिन तक खाक छाननी पड़ती थी। तब कई गिरोह यह कार्य कर रहे थे। इनमें एक नाम निर्भय गुर्जर का भी था। वह वर्ष 2005 में पुलिस की मुठभेड़ में वह मारा गया था। गिरफ्तार आरोपी उसके लिए सक्रिय सदस्य के रूप में काम करता था। वह ऐसे लोगों को फंसाता था, जिनके पास रकम होती थी फिर अपहरण कर गिरोह को साैंप देता था। इसके बदले में उसे कमीशन मिलता था। निर्भय गुर्जर फिराैती की रकम की वसूली करता था।
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चार साल में ठिकाना, छह महीने में बदलता था मोबाइल नंबर
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी टाइगर मूलरूप से कानपुर देहात का रहने वाला है। वर्तमान में अपने भाई के परिवार के साथ बांदा के थाना जसपुर क्षेत्र में रह रहा था। उसने पुलिस को बताया कि अपहरण के मामले में नाम आने के बाद पुलिस तलाश में लगी थी इसलिए घर बेचकर फरार हो गया। पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं। उस पर पहले 500 रुपये इनाम घोषित हुआ। इस पर राजकोट, गुजरात चला गया। वहहां पर ट्रक चलाने लगा। चार साल रुकने के बाद मध्य प्रदेश के इंदाैर चला गया। यहां भी कुछ साल ठिकाना बनाए रखा। बाद में महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे में भी रहने गया। यहां पर मजदूरी करने लगा। बाद में पंजाब भी गया। वह जहां जाता था, वहां नाम बदल लेता था। छह महीने में मोबाइल नंबर भी बदलता रहता था। हाल में बांदा में रह रहा था। पकड़े जाने के बाद वह पुलिस से भिड़ गया। कहने लगा कि क्यों पकड़ा है। बाद में उसे बताया गया कि इनामी है। अपहरण कर फरार हो गया था। इसके बाद वह शांत हुआ और पूछताछ में पूरी कहानी बयां कर दी।
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दो साल तक कैद में रहा हरिओम, खुद ही भागकर आया
गिरोह ने राटाैटी गांव, पिढ़ाैरा के हरिओम का अपहरण किया था। वह ट्रक चलाता था। आरोपी टाइगर के पकड़े जाने के बाद हरिओम ने बताया कि उसके बड़े भाई उमाशंकर की शादी के लिए परिजन रिश्ता देख रहे थे। तभी गांव के दाऊजी और नेकराम से बात की। उन्होंने टाइगर से मिलाया। वह उसे बहाने से इटावा ले गया। इसके बाद बीहड़ में ले जाकर निर्भय गुर्जर गिरोह को साैंप दिया था। परिजन ने किसी तरह इंतजाम करके 70 हजार रुपये दे दिए मगर बाकी रकम नहीं दे पाए इसलिए गिरोह ने उसे छोड़ा नहीं। यातनाएं दी गईं। बाद में उसे अपने साथ ही गिरोह ने रख लिया। वह दो साल तक उनके साथ ही रहा। एक दिन निर्भय गुर्जर के रिश्तेदार की शादी थी। इसमें गिरोह के सदस्य चले गए। इस पर वो माैका पाकर चंगुल से भाग निकला। तब तक पुलिस भी उसे बरामद नहीं कर सकी थी।