तिब्बत के भूकंप से हुई पृथ्वी में हलचल के दौरान असाधारण बदलाव रिकॉर्ड किए गए। ये बदलाव आरबीएस बिचपुरी समेत नौ स्टेशनों पर दर्ज हुए, जिन पर अध्ययन किया जा रहा है।
तिब्बत में आए भूकंप से पृथ्वी के अंदर जो हलचल मची, उसे आरबीएस कॉलेज की बिचपुरी लैब समेत नौ स्टेशनों पर दर्ज किया गया। पृथ्वी की हलचल के कारण आए बदलावों का अध्ययन किया जा रहा है, जिससे भूकंप के बारे में और ज्यादा जानकारी मिल सकेगी।
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राजा बलवंत सिंह इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस बिचपुरी में सिस्मो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एंड स्पेस रिसर्च लैब में तिब्बत में आए भूकंप की हलचल दर्ज हुई है। तिब्बत में 7.1 रिक्टर स्केल पर भूकंप आया था। बिचपुरी में डॉ. देवव्रत पुंढीर के निर्देशन में चल रही सिस्मो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एंड स्पेस रिसर्च लैब के साथ यह हलचल लखनऊ, बंगलूरू, भोपाल, देहरादून, कानपुर, पोर्ट ब्लेयर, जोधपुर, शिलांग के स्टेशन में भी दर्ज हुई है। उन्होंने बताया कि इन पर अभूतपूर्व परिवर्तन देखे गए हैं। इनको गहराई से जानने के लिए रिसर्च चल रही है।
आयन मंडल में असाधारण बदलाव
डॉ. पुंढीर ने बताया कि आयन मंडल के कुल इलेक्ट्रॉन की संख्या में उस दौरान व उससे पूर्व असाधारण बदलाव रिकॉर्ड किए गए हैं। यह बदलाव आगरा लैब के साथ-साथ कुल 11 आईजीएस स्टेशनों, जिसमें से भारत में कुल नौ स्टेशन, चीन के 2 व दक्षिण कोरिया में स्थित एक स्टेशन के आयन मंडल में उपस्थित कुल इलेक्ट्रानों की मात्रा में दर्ज हुआ है। इन सभी जगह बदलाव देखे गए।
भारत की पहली सिस्मो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रयोगशाला
भूकंप के पूर्व कई दिनों के डाटा का अध्ययन करने पर यह बदलाव स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं। संस्थान के निदेशक अकादमिक प्रो. बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि बिचपुरी की लैब वर्ष 1998 से लगातार भूकंप के पूर्वानुमान लगाने में अपना योगदान देती आ रही है। यह भारत की पहली सिस्मो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रयोगशाला है।