ताजमहल में भीड़ नियंत्रण (क्राउड मैनेजमेंट) की दिशा में पहला प्रयास रविवार को शुरू हो गया। रविवार को ताज का दीदार करने आए देसी-विदेशी पर्यटकों को ‘तीन घंटे की वैधता अवधि’ का टिकट दिया गया। हालांकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने रविवार को इसे बतौर ट्रायल ही रखा। पर्यटकों ने ताज में मन मुताबिक समय बिताया। इसके साथ ही पर्यटकों की सही संख्या का आकलन करने के लिए 15 साल तक के बच्चों के लिए जीरो वैल्यू (शून्य कीमत) के टिकट की शुरुआत हुई।
छुट्टी का दिन होने के बाद भी ताज पर पर्यटकों की ज्यादा भीड़ नहीं थी। इस कारण एएसआई कर्मियों और सीआईएसएफ के जवानों को पर्यटकों को संभालने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। हालांकि बच्चों का टिकट लेने के लिए पर्यटकों को मशक्कत करनी पड़ी।
बच्चों का टिकट खरीदने के कारण प्रवेश के लिए लाइन में लगने में उनको देरी हुई। उधर, बच्चों का टिकट भी दोनों गेटों पर चेक किया गया। इस कारण लाइन में पर्यटकों को ज्यादा समय गुजारना पड़ा। ऑनलाइन बुक कराने वाले टिकटों में एक सप्ताह पहले से ही तीन घंटे की वैधता अवधि लिखकर दी जा रही है।
अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. भुवन विक्रम ने बताया कि पहले दिन इस व्यवस्था को बतौर ट्रायल ही रखा गया था। बच्चों को भी टिकट की शुरुआत की गई। परिणाम अच्छा रहा।
विदेशी पर्यटक पड़े भ्रम में, करते रहे पूछताछ
ताज का भ्रमण करने आए विदेशी पर्यटक तीन घंटे की वैधता अवधि को लेकर भ्रम की स्थिति में रहे। जिन पर्यटकों के साथ गाइड थे, उन्हें गाइड ने समझाया। बगैर गाइड के भ्रमण करने के लिए आने वाले पर्यटक सवाल करते रहे कि अभी ताज के अंदर ही रहना है या फिर समय समाप्ति के बाद बाहर निकलना है। कई पर्यटकों ने इस संबंध में एएसआई के कर्मचारियों से भी पूछताछ की।
पुणे से आए आकाश ने कहा कि, ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में से एक है। विदेशियों से ज्यादा देश के विभिन्न हिस्सों से भारतीय पर्यटक ताज का दीदार करने आते हैं। ऐसे में तीन घंटे का समय निर्धारित करने का औचित्य समझ से परे है। भारतीय पर्यटकों को ज्यादा समय दिया जाना चाहिए।
स्पेन से आए अल्बर्टो ने कहा कि, ताजमहल बेहद खूबसूरत इमारत है। इसे कुछ देर देखने से मन नहीं भरता। भारत सरकार ने तीन घंटे के लिए टिकट देना शुरू किया है। इसमें लंबी दूरी पैदल चलकर आना होता है। ऐसे में ये फैसला ठीक नहीं है। पर्यटक इसे बारीकी से देखना चाहते हैं।
वहीं दिल्ली से आए अजीत कुमार का कहना था, ताज में तीन घंटे की वैधता अवधि का टिकट मानसिक रूप से पर्यटक को तैयार करने के लिए है। वैसे ये संभव नहीं लगता कि तीन घंटे के बाद कर्मचारी पर्यटकों को तलाश करेंगे। जब तक कि कोई इलेक्ट्रोनिक सिस्टम नहीं होगा, वैधता अवधि का कोई मतलब नहीं है।
टर्न स्टाइल गेट लगने पर बढ़ेगा महत्व
टर्न स्टाइल गेटों के लगने के बाद ही वैधता टिकट पर तीन घंटे गुजारने की बाध्यता होगी। चूंकि गेट पर लगे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में पर्यटक के प्रवेश के वक्त टाइमिंग देखी जाएगी। इसके बाद पर्यटक के बाहर निकलने पर टिकट देखा जाएगा। अगर तीन घंटे से ज्यादा वक्त हो गया होगा तो पर्यटक को दूसरा टिकट लेना पड़ेगा।