राष्ट्रीय जालमा संस्थान में आयोजित कार्यक्रम ने शामिल विज्ञानी
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आगरा कोविड के बाद वायरस जनित बीमारियों का खतरा टला नहीं है। चिकित्सा विज्ञानियों का मानना है कि भविष्य में कई तरह के वायरस सामने आ सकते हैं, जिससे महामारी हो सकती है। इनसे निपटने के लिए नई वैक्सीन पर भी शोध कार्य चल रहा है।
राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य माइकोबैक्टीरियल रोग संस्थान और पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के विज्ञानी शोध कार्य कर रहे हैं। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीएस चौहान ने बताया कि कोरोना वायरस से दुनियाभर में कई जान गईं। भविष्य में वायरस जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
पुणे की संस्थान और जालमा संस्थान के चिकित्सक नए वायरस के खतरे को देखते हुए नई वैक्सीन समेत अन्य शोध कार्य कर रहे हैं। इससे लोगों में एंटीबॉडी विकसित हो जाएगी और वायरस बेअसर साबित होगा।
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राजकमल ने कोरोना वायरस वैक्सीन के बारे में बताया कि कोरोना वायरस को आइसोलेट करते हुए अध्ययन किया गया था। जिसमें मृत-जीवित वायरस के जरिये ही रिकाॅर्ड समय में वैक्सीन तैयार की गई थी। वैज्ञानिक डॉ. विवेक गुप्ता ने बताया कि वैक्सीन का तीन चरणों में ट्रायल भी हुआ। पहले लैब और दूसरे चरण में चूहों पर प्रयोग किया। इसमें सफलता मिलने के बाद अंत में मनुष्यों पर वैक्सीन का असर देखा गया। कोई दुष्प्रभाव सामने नहीं आने पर रिकाॅर्ड कम समय में वैक्सीन तैयार की गई थी।
छात्र-छात्राओं को दिखाई राह
-जालमा संस्थान में इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च सेंटर और शाइन ने अगली पीढ़ी को वैज्ञानिक बनने को प्रेरित करने के लिए अभियान शुरू किया है। इसमें शुक्रवार को 10 विद्यालयों के 200 से अधिक छात्र-छात्राओं को बुलाया। इसमें बच्चों को वैक्सीन बनाने, शोध करने के बारे में जानकारी दी। प्रयोगशाला का भ्रमण कराया। वैज्ञानिकों ने इसमें कॅरिअर बनाने के लिए राह दिखाई। छात्र-छात्राओं के प्रश्नों का जवाब देकर वैज्ञानिकों ने समाधान भी कराया। कार्यक्रम में डॉ. भावना शर्मा, डॉ. कामेश्वर मिश्रा आदि मौजूद रहे।