आगरा। काॅन्वेंट स्कूलों में प्रवेश दिलाने का झांसा देकर रकम ऐंठने का मामला हरीपर्वत थाना क्षेत्र में सामने आया है। प्रदेश सरकार की महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य का फर्जी पत्र बनाकर स्कूलों में दबाव बनाया गया। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनको कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। दो आरोपी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगी है।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि मंत्री बेबी रानी मौर्य के नाम से दो बच्चों के दाखिले के लिए स्कूलों में सिफारिशी पत्र भेजे गए थे। इस बात की जानकारी मंत्री को हो गई। यह पत्र उनके कार्यालय से जारी नहीं हुए थे। उन पर जो पत्रांक संख्या अंकित है, उस पत्रांक संख्या पर दूसरी जगह पत्र भेजे गए थे। पत्र पर उनके हस्ताक्षर भी फर्जी थे। मामले में शिकायत मिलने पर थाना हरीपर्वत में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इसमें कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी की धारा लगाई गईं। छानबीन के बाद पुलिस को चार लोगों के नामों की जानकारी हुई। इनमें नालंदा टाउन, एकता निवासी तरुण बनर्जी व जैद अहमद (ज्योति नगर, ताजगंज) को गिरफ्तार किया। वहीं उनके दो साथी शेर सिंह और मलिक भी हैं। वह भाग गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि मोहम्मद इकबाल और अमन के बच्चों का दाखिला कराने के लिए 50-50 हजार में ठेका लिया था। उन्हें लग रहा था कि मंत्री के पत्र से प्रधानाचार्य ज्यादा जानकारी नहीं लेंगे। प्रवेश मिल जाएगा। दोनों ने पत्र छपवाए। इसके बाद मंत्री के फर्जी हस्ताक्षर कर दिए। इसे स्कूलों में लगा दिया। स्कूलों ने अपनी तरफ से पूछताछ कर ली तो मामला सामने आ गया। भागे हुए दोनों आरोपी की पुलिस तलाश में लगी है।
बिल्डिंग ठेकदार है मुख्य आरोपी
थाना प्रभारी का कहना है कि तरुण बनर्जी बिल्डिंग ठेकेदार है। वह रिपेयरिंग का काम कराता है। वहीं जैद की सदर में टेलर की दुकान है। उसके पड़ोस में ही मलिक भी रहता है। जैद और मलिक ने बच्चों के अभिभावकों से बात की थी। वहीं तरुण सिंह ने शेर सिंह की मदद से पत्र छपवाए थे। इसके बाद अरुण स्कूल में पत्र लगाने गया था। अब पुलिस यह पता कर रही है कि पत्र कहां पर छपवाए गए। यह शेर सिंह की गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगा।
कक्षा नर्सरी और एक में प्रवेश का ठेका
मोहम्मद इकबाल और अमन ने स्कूल में प्रवेश के लिए बात की थी। एक ने अपने बच्चे का नर्सरी में प्रवेश के लिए सेंट फेलिक्स स्कूल तो दूसरे ने अपनी बच्ची का कक्षा एक में सेंट पैट्रिक्स में प्रवेश के लिए फाॅर्म भरा था। दोनों एजेंटों के झांसे में आ गए थे। वह यह सोच रहे थे कि प्रवेश मिल जाएगा। पुलिस ने दोनों अभिभावकों से भी बात की।