यमुनापार इलाके में वर्चस्व की जंग ही राज चौहान की हत्या की बड़ी वजह बनी। पुलिस की जांच में पता चला है कि हत्याकांड से चार दिन पहले राज चौहान ने खुले तौर पर एलान किया था कि ‘यमुनापार में एक ही रहेगा, जो जिंदा बचेगा उसी का सिक्का चलेगा।’ उसने शोएब मंसूरी के भाई की पिटाई कर यह धमकी दी थी।
इस घटना के बाद शोएब मंसूरी ने राज चौहान की हत्या करने की तैयारी कर ली थी और साजिश रचने लगा था। तीन दिन पहले ही उसने परिवार को कहीं और भेज दिया था। पुलिस के मुताबिक जलेसर मार्ग स्थित एसएन स्टे गेस्ट हाउस में शुक्रवार रात राज चौहान अपने आठ साथियों के साथ शराब पार्टी कर रहा था, तभी 10 हमलावरों ने गेस्ट हाउस में घुसकर हमला बोला।
तीसरी मंजिल की गैलरी में भागते हुए राज चौहान को सात गोलियां मारी गईं, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना का लाइव सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हाथ लगा है, जिसके आधार पर हमलावरों की पहचान की गई है। जांच में सामने आया है कि राज के दोस्त विनय कश्यप ने ही हत्यारों को जानकारी दी थी। हमले से पहले ही वह बहाना बनाकर कमरे से बाहर निकल गया था मैसेज भेजकर हत्यारों को बुला लिया था।
पुलिस को यह भी जानकारी हुई है कि फिरोजाबाद जेल में बंद गैंगस्टर आलोक यादव का भाई डीपी यादव आलोक का गैंग चला रहा है। राज चौहान के बढ़ते दबदबे से यमुनापार में अन्य गैंग के लोग परेशान हो गए थे। उन्होंने नए दुश्मन से दोस्ती कर साजिश रची। शोएब अंसारी को मोहरा बनाया गया, जबकि असली साजिशकर्ता अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।