पटियाली। ग्रामीण न्यायालय परिसर में पहुंचने वाले वादकारियों के लिए सुविधाएं नहीं हैं। वादकारियों के लिए न तो बैठने के लिए बेंच हैं और न ही पेयजल की व्यवस्था है। वादकारियों और अधिवक्ताओं ने व्यवस्थाओं के सुधार की मांग उपजिलाधिकारी से की है।
ग्रामीण न्यायालय को बने हुए कई वर्ष हो चुके है। लेकिन वादकारियों के लिए सुविधा नहीं है। गर्मी में तेज धूप में वादकारी इधर - उधर खड़े रहते हैं या फिर दीवारों के सहारे छाया देखकर बैठ जाते हैं। वहीं गर्मी में प्यास लगने पर पेयजल के लिए वादकारियों और अधिवक्ताओं को परेशान होना पड़ता है। हैंडपंप का भी इंतजाम नहीं हैं। उन्हें न्यायालय परिसर से पेयजल के लिए बाहर जाना होता है। व्यवस्थाओं में सुधार के लिए मांग करने वालों में बार एसोसिएशन अध्यक्ष ओमकार सिंह चौहान एडवोकेट, अरुण कुमार चतुर्वेदी, प्रेम नरायन दीक्षित, आदिल अली, अशोक कुमार चौहान आदि अधिवक्ता शामिल हैं।
- ग्रामीण न्यायालय को बने हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन न्यायालय के उच्चाधिकारियों द्वारा न्यायालय परिसर में वादकारियों के बैठने के इंतजाम नहीं है। तारिक हसन, अधिवक्ता
- उच्चाधिकारियों को ग्रामीण न्यायालय परिसर में पेयजल और बैठने के लिए बेंच को लगाने के लिए मांग पत्र दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। - कुंवरपाल यादव, अधिवक्ता
- गर्मी का मौसम आ चुका है, वादकारियों के लिए पीने का पानी और बैठने के लिए छायादार टीन शेड होना चाहिए। लेकिन इंतजाम न होने से परेशानी होती है। नाजिम अली, अधिवक्ता
- न्यायालय में वादकारियों को जमीन पर बैठना पड़ता है। बेंच तक नहीं हैं। ग्रामीण न्यायालय के बैठने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए । - शिवेंद्र मिश्रा, अधिवक्ता।