कासगंज। जिले में बर्न यूनिट न होने से हादसों में जलने वाले मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पाता है। गंभीर मरीजों को मौत का खतरा भी सही समय पर इलाज नहीं मिल पाने की वजह से रहता है। मरीजों को अलीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। समय से इलाज न मिलने पर कई मरीजों की जान जा चुकी है। बावजूद स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है।
जिला को सृजित हुए डेढ़ दशक से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन जिले में अभी भी इलाज के बेहतर साधन उपलब्ध नहीं हो सके हैं। सबसे बड़ी कर्मी बर्न यूनिट की खलती है। जिले में आग लगने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। ऐसे में लोग आग की चपेट में आकर झुलस जाते हैं। तो वही खाना बनाते समय महिलाएं एवं बच्चे आग की चपेट में आ जाते हैं। कभी कभी तो लोग गंभीर रूप से जल जाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ऐसे मरीजों को समुचित उपचार नहीं दे पाता।
जिला अस्पताल को संचालित हुए भी चार साल से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन इस अस्पताल पर जलकर पहुंचने वाले मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पाता। विभाग आज तक अस्पताल पर बर्न यूनिट की स्थापना नहीं कर सका है। जिला अस्पताल में एक साल में 100 तक मरीज ऐसे आते हैं जो किसी किसी कारण से जल जाते हैं। जो मरीज मामूली रूप से झुलसे होते हैं उनको दवा आदि दे दी जाती है, लेकिन जो मरीज गंभीर रूप से जलते हैं, उनको अलीगढ़ रेफर करना पड़ता है। एक साल में 50 तक मरीज रेफर हो जाते हैं। जलने पर सबसे अधिक खतरा इंफेक्शन फैलने का खतरा रहता है। यदि समय रहते उपचार न दिया जाए तो मरीज की जान तक जा सकती है।
जलने पर यह करें उपाय
-जले हुए स्थान को साफ और ठंडे पानी से धीरे-धीरे धोएं।
-जलन को कम करने के लिए बर्फ को कपड़े में लपेटकर इस्तेमाल करें
-जले स्थान पर बरनोल का लेप लगाएं।
-प्राथमिक उपचार के तौर पर जले हुए अंग पर सोफ़रामाइसिन भी लगा सकते हैं।
-मरीज को जल्द से जल्द चिकित्सक को दिखाएं।
-चिकित्सक की सलाह के मुताबिक दवाओं का सेवन करें।
जिला अस्पताल पर बर्न यूनिट की स्थापना का प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा जाएगा। ताकि मरीज को समुचित इलाज जिले में ही मिल सके।
- डा. संजीव सक्सेना,सीएमएस