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..तो नवजात शिशुओं का श्मशान बन जाता एसएन

Wed, 12 Aug 2015 02:06 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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एसएन मेडिकल कालेज के इंक्युबेटर में 14 नवजात शिशु थे। सभी की हालत बेहद नाजुक थी। यूं कहिए मशीन के सहारे ही इनकी सांसें चल रही थीं। बिजली क्या गई, सांसों की डोर टूटनी शुरू हो गई। दुनिया देखने से पहले ही फूल से तीन मासूम चले गए। बाकी 11 पर भी मौत का साया मंडरा गया था। दम घोंट देने वाली जानलेवा गर्मी में छह घंटों तक बुरी तरह तड़पते रहे। इनका नसीब ही था, जो बच गए, वरना डाक्टरों ने तो लापरवाही बरतने में जरा सी भी कसर नहीं छोड़ी थी।
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जेनरेटर में जंग लग गया
तीन शिशुआें की मौत के बाद कालेज प्रशासन ने अपनी कारगुजारी छिपाने के इंतजाम भी शुरू कर दिए। सुबह आनन-फानन में जनरेटर दुरुस्त कराने को इलेक्ट्रीशियन बुलाया। वह जनरेटर कक्ष का ताला नहीं खोल पाए। ताले में जंग लगा था, बमुश्किल से इसे खोला गया। वहीं दूसरी मंजिल की वायरिंग भी सही कराई। यह नजारा स्वयं सिटी मजिस्ट्रेट ने देखा।

बच्चों की जान से खिलवाड़ किया
बिजली जाने से बीमार शिशुओं की हालत बिगड़ने लगी तो यहां के स्टाफ ने इनके तीमारदारों से इमरजेंसी जाने के लिए कहा। वहां पहुंचे तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि इमरजेंसी से वार्ड में भर्ती मरीजों को वापस इमरजेंसी में नहीं रखा जाता।
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गंदगी से वार्ड बने नरक
बाल रोग विभाग में गंदगी का आलम है। पास ही डलाबघर बना दिया गया है। इसमें मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है। शौचालय तक गंदे हैं, दुर्गंध के चलते वार्ड में ठहरना भी मुश्किल है। पानी की व्यवस्था नहीं है।

बाल आयोग में करेंगे शिकायत
क्राई संस्था के नरेश पारस तीमारदाराें के साथ शिकायत करने प्राचार्य कार्यालय पहुंचे। प्राचार्य के लखनऊ में होने के चलते मुलाकात नहीं हो सकी। प्राचार्य प्रभारी और विभागाध्यक्ष से शिकायत की। उन्होंने पूरे मामले की शिकायत बाल आयोग में करने की बात कही है।

तीमारदारों का दर्द
नर्स दवा देने नहीं आती हैं। कुछ भी कहें तो चिल्लाती हैं। कूलर भी नहीं लगे हैं। गर्मी से बुरा हाल है।
- मनोज माहौर

सोमवार रात 11 बजे बिजली गई, सुबह पांच बजे आई। तब तक यहां सभी व्यवस्थाएं ठप रहीं। कोई सुनने वाला नहीं था।
- रामनिवास, कन्नौज

बिजली जाने के बाद गर्मी से बुरा हाल हो गया था। सड़क पर पूरी रात बिताई। यहां कोई सुनने वाला नहीं था।
- अनीता, ताजगंज

मजिस्ट्रेटी जांच : वार्ड ब्वाय से लेकर एचओडी तक दोषी
आगरा। एसएन मेडिकल कालेज में हुई तीन मासूम बच्चों की मौत के मामले में कालेज प्रबंधन की लापरवाही पाई गई है। वार्ड ब्वाय से लेकर एचओडी तक दोषी पाए गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट और सीएमओ ने मामले की जांच कर रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। जांच में कई स्तर पर एसएन प्रबंधन की खामियां उजागर हुई हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस चौहान ने बताया कि टोरंट कंपनी के सिर ठीकरा फोड़ने से कालेज प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। विद्युत आपूर्ति ठप होने का कारण कालेज के अंदर हुआ कोई फाल्ट है। और भी ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब कालेज प्रबंधन के पास नहीं है। जैसे जब लाइट गई तो जनरेटर क्यों नहीं चला? वहां जनरेटर चलाने के लिए कोई कर्मचारी तैनात क्यों नहीं था?
आईसीयू में वार्ड ब्वाय की ड्यूटी क्यों नहीं थी? ऐसी स्थिति में वेंटीलेटर पर मैन्युअल उपाय किए जाते हैं, उनमें भी लापरवाही बरती गई। वार्ड में और भी बच्चे भर्ती थे, उनकी जान की रक्षा कैसे होती? वार्ड के इंचार्ज की भी लापरवाही उजागर हुई है। जूनियर डाक्टरों ने भी तीमारदारों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया। ऐसी स्थिति में विभागाध्यक्ष ने भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है। सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस चौहान ने बताया कि रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। साथ ही वार्ड में 25-25 केवी के दो जनरेटर तत्काल लगाने का सुझाव दिया गया है।

लापरवाही पहली बार नहीं
डेढ़ साल पहले भी बाल रोग विभाग में आक्सीजन की सप्लाई बंद होने से दो शिशुआें की मौत हो गई थी। परिजनों ने बवाल किया था। मामले की विभागीय जांच भी कराई गई। लेकिन जांच में आरोप खारिज कर दिए गए। वैसे आए दिन तीमारदार रात में चिकित्सकीय और नर्सिंग स्टाफ गायब रहने की शिकायत करते रहे हैं। 
टोरंट का दावा, नहीं काटी एसएन की बिजली
नो पावर की शिकायत पर पहुंची टीम को सप्लाई मीटर तक सुचारु मिली
आगरा। एसएन मेडिकल कालेज में तीन नवजातों की मौत का मामला तूल पकड़ने के बाद टोरंट पावर ने भी पक्ष प्रस्तुत किया है। अधिकारियों का दावा है कि पूरे शहर में दो घंटे के ब्लैक आउट के दौरान भी एसएन मेडिकल कालेज की बिजली नहीं काटी गई थी। सोमवार रात 12:58 बजे नो पॉवर की शिकायत दर्ज कराई गई। निरीक्षण को पहुंची टीम को मीटर तक आपूर्ति ठीक मिली।
टोरंट पावर की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि मेडिकल कालेज 11 केवी (एचटी) उपभोक्ता है। जिसको विद्युत आपूर्ति दो अलग-अलग फीडरों से उपलब्ध कराई जाती है। यदि किसी कारणवश एक फीडर से आपूर्ति बाधित होती है तो तत्काल दूसरे फीडर से विद्युत ट्रांसफर कर दी जाती है। पूरे शहर में कटौती होने पर भी मेडिकल कालेज की विद्युत आपूर्ति बाधित नहीं की जाती। मेडिकल कालेज की आंतरिक विद्युत व्यवस्था कालेज प्रशासन के पास है। आंतरिक तकनीकी कारणों से ही बिजली गई होगी।
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