हो गए नाजुक बहुत इस दौर में रिश्तों के धागे
युग बोध वाटिका में कवि सम्मेलन में कवियों ने किया कविता पाठ
संवाद न्यूज एजेंसी
करहल। विकास खंड करहल के गांव सींगपुर स्थित युग बोध वाटिका में बुधवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे कवियों ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। मथुरा से आए नारायण सिंह ने हो गए नाजुक बहुत इस दौर में रिश्तों के धागे कविता पढ़ी तो लोगों ने खूब तालियां बजाईं।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार डाॅ. पदम सिंह पदम ने मां सरस्वती की आराधना के साथ किया। इसके बाद मथुरा से आए कवि नारायण सिंह बल्देव ने हो गए नाजुक बहुत इस दौर में रिश्तों के धागे कविता पढ़ी। इटावा से आए कवि रोहित चौधरी ने कंस और शिशुपाल बहुत हैं अब भारत के आंगन में, कवयित्री शिवालनी यादव ने गीतों को मैं गाती हूं नित माटी के वास्ते गीत सुनाया। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार डॉ. दीनमोहम्मद दीन ने आओ कवियो आओ खुशी के गीत गाओ कविता पढ़ी। प्रेम सिंह शाक्य ने ज्ञान पुंज का प्रकाश दूर-दूर विश्वमाहि कविता पढ़ी।
महाराम सिंह मृदल ने मत करो मखौल सरहद के पहरियों के साथ, जी रहे खुले में उन्हीं की महरवानियों के साथ कविता पढ़कर खूब तालियां बटोरीं। राजवीर सिंह राज ने यह दासी उदासी प्यासी रहे तेरे दर्शन नीर बिना सजना, संजू सूर्यम ठाकर ने- वतन की शान में यारो लहू अपना बहाएंगे, बदन में सांस जब तक है तिरंगा ऊंचा उठाएंगे, कविता पढ़ी। समीश समर्थ ने हमने ही गणित को शून्य दिया और बिंदु दशमलव सिखलाया, राकेश सरल ने दीन दुखियों के मनो सम्मान का यश फैला धरा पर यों ही रहे कविता पढ़ी।
पूर्व में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सतीश कुमार और विशिष्ट अतिथि नितिन चतुर्वेदी ने किया। संयोजक डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह और बृजप्रताप सिंह ने अतिथियों का सम्मान किया।