कासगंज। 26 जनवरी 2018 को गणतंत्र दिवस का जश्न मनाया जा रहा था। पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी व आम नागरिक, सभी इस जश्न में शामिल थे। इसी बीच तिरंगा यात्रा को लेकर ऐसा उपद्रव हुआ कि हाथ में तिरंगा लेकर देशभक्ति के रंग में डूबा युवक चंदन गुप्ता हिंसा का शिकार हो गया। गोली लगने से चंदन की मौत के बाद पूरे शहर में हिंसा फैल गई। जगह-जगह आगजनी, पत्थरबाजी और संघर्ष ने माहौल को खराब कर दिया।
चंदन की मौत की सूचना जैसे-जैसे लोगों को हुई हालात बिगड़ते चले गए। इस हत्या से लोगों में जबरदस्त आक्रोश था। शहर से शुरू हुई हिंसा की लपटें जिले के कस्बों तक जा पहुंचीं। पांच दिन तक जिला अशांत रहा। लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ व अन्य मुख्यालयों से पुलिस के अफसर, आरएएफ, पीएसी के हजारों जवान शांति व्यवस्था बनाने में जुटे रहे। पुलिस ने चंदन के पिता सुशील गुप्ता की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की धर-पकड़ शुरू की। वहीं, हिंसा भड़काने के मामले में भी कई आरोपी गिरफ्तार किए गए।
कई दिनों तक बने रहे अघोषित कर्फ्यू के हालात
हिंसा के दौरान एक ओर जहां कई दिनों तक गोरिल्ला हमले जारी रहे, वहीं आक्रोशित लोग हत्यारों को सजा देने की मांग करते रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी चंदन के हत्यारों को सजा दिलाने की घोषणा की। चप्पे-चप्पे पर पुलिस के अधिकारी व फोर्स ने ऐसी घेराबंदी की कई दिनों तक अघोषित कर्फ्यू के हालात बन गए। बारहद्वारी का मुख्य बाजार भी हिंसा व उपद्रव का शिकार हुआ।
धीमे-धीमे पांच दिन के बाद जनजीवन पटरी पर लौटना शुरू हुआ, लेकिन तनाव कई दिन तक बरकरार रहा। जिले के कस्बे अमांपुर और गंजडुंडवारा में शांति को पलीता लगाने की कोशिशें हुईं, लेकिन प्रशासन व पुलिस ने इन करतूतों पर अमन पसंद लोगों के सहारे नियंत्रण पा लिया।