कासगंज के बरौना गांव में कटान के बाद गांव के नजदीक पहुंचा बाढ का पानी ।
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कासगंज। पटियाली तहसील के गांव बरौना में सड़क शुक्रवार की भोर में कटकर गंगा की चपेट में आ गई। जिससे एक ओर से कटान करती हुई गंगा की धारा गांव की आबादी के बीच पहुंच गई। निगरानी कर रही टीमों ने रात को ही प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी। पीएसी की फ्लड यूनिट गांव में पहुंच गई। यह फ्लड यूनिट किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने के लिए तैनात की गई है। एसडीआरएफ की टीम अभी तक नहीं पहुंची है। स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग की टीमें भी सक्रिय हो चुकी हैं। वहीं राहत शिविर में प्रभावित होने वाले 20 से अधिक परिवार पहुंच गए हैं।
पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति ने वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता करके टीम की उपलब्धता सुनिश्चित कराई और शुक्रवार को टीम गांव में पहुंच गई। फ्लड यूनिट की टीम को गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में ठहराया गया है। पीएसी के जवानों ने अपनी नाव भी गंगा में डाल दी हैं। जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। गांव की सड़क कट जाने के बाद से बरौना के ग्रामीण बेहद मायूस हैं। अब उन्हें बचाव का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा क्योंकि लगातार किए जा रहे कटान रोधी कार्य पूरी तरह से विफल साबित हुए। ऐसी स्थिति में जो ग्रामीण कटान रोकने की स्थिति में गांव में ही डटे हुए थे, अब वे सुरक्षित स्थान की ओर और प्रशासन के राहत शिविर में पहुंचने लगे हैं। राहत शिविर में ग्रामीणों के 20 से अधिक परिवार पहुंच चुके हैं। आस पास की टीम ने राहत शिविर में पहुंचे ग्रामीणों का चिकित्सीय परीक्षण किया और उन्हें दवाईयां दीं।
इसके अलावा पशुपालन विभाग की टीमें भी बरौना में सक्रिय हो गईं। कृष्णजीत शाक्य ने बताया कि अभी तक कटान रोधी कार्य चलने के कारण घर के बचने की उम्मीद थी, लेकिन अब उम्मीदों पर पानी फिर गया है। ऐसी स्थिति में पास के ही गांव बरी बगवास में एक मकान किराए पर लिया है वहीं सामान और परिवार के लोगों को पहुंचाया है। ग्रामीण वीरेंद्र और दुर्गेश ने बताया कि उन्होंने भी गांव छोड़ अपना सामान लेकर अपनी बहन के गांव नगला भगन में पहुंच गए हैं। वहीं ग्रामीण प्रेमपाल, महेश कुमार, रामशंकर, रेवती, प्रह्लाद, कुंवर सिंह, मुरारीलाल, भूरे, गेंदा लाल, उमेश, दयाराम, कुंवरपाल, झंडु, बृजेश आदि ने अपना सामान समेटकर और पशुओं को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर लिया है। इन ग्रामीणों का कहना है कि कटान रुकने की कोई स्थिति नजर नहीं आ रही। ऐसे में गांव छोड़ने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।