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परिणाम से पहले ही मान ली थी भाजपा ने हार

Fri, 08 Jan 2016 01:44 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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न भाजपा के झंडे न बैनर, न ढोल-नगाड़े न जयकारे...जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के दौरान कलेक्ट्रेट में पता ही नहीं चला कि सपा के अलावा भाजपा प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में है। उदासीनता का आलम यह था कि कार्यकर्ता तो दूर भाजपा के नेता तक नजर नहीं आए। चार घंटे के चुनावी शो में भाजपा किसी रोल में नहीं दिखाई दी। मानो पार्टी ने एकतरफा चुनाव मानकर परिणाम आने से पहले ही ‘सरेंडर’ कर दिया हो।
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जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव से पहले भाजपा ने बड़े-बड़े दावे किए थे। मगर, जब मतदान का दिन आया तो जोश ही दिखाई नहीं दिया। जबकि सपाइयों का उत्साह हिलोरे मार रहा था। कलेक्ट्रेट के अंदर और बाहर के माहौल से अंदाजा लगाया जा सकता था कि भाजपा अपने कदम पहले ही खींच चुकी थी। मतदान के लिए 17 जिला पंचायत सदस्यों को लेकर पहुंचे सांसद चौधरी बाबूलाल के साथ पार्टी के नेता और कार्यकर्ता न के बराबर थे। उनके परिवारीजन और चुुनिंदा करीबी ही सदस्यों के साथ दिखाई दिए। कलेक्ट्रेट से चंद कदमों की दूरी पर स्थित होटल मोती पैलेस में जरूर कुछ भाजपाई मंथन करते नजर आए मगर, मतदान प्रक्रिया के दौरान वे भी नदारद रहे। स्थिति ये थी कि परिणाम आने से पहले ही भाजपाई घरों को लौट गए। परिणाम जानने का भी उन्होंने इंतजार नहीं किया।
चुपके से निकले राकेश चौघरी
चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा प्रत्याशी राकेश चौधरी चुपके से कलेक्ट्रेट से निकल गए। मौके पर पहुंचे चुनिंदा समर्थक उन्हें ढूंढते रहे। बाद में पता चला कि अधिकारियों ने उन्हें किसी विवाद से बचाने के लिए चुपके से गाड़ी में बैठाकर रवाना कर दिया।
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बसपा की डील और सत्ता के दुरुपयोग से हुई हार : सांसद
भाजपा प्रत्याशी राकेश चौधरी के पिता सांसद चौधरी बाबूलाल ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बसपा पर सपा के साथ बड़ी डील और सपा पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। चुनाव संयोजक रहे प्रदेश मंत्री रामप्रताप सिंह चौहान ने भी बसपा को आड़े हाथों लिया है।
बाबूलाल ने पार्टी प्रत्याशी की हार स्वीकारते हुए कहा कि चुनाव भाजपा ने पूरी ताकत के साथ लड़ा। मगर, सपा के साथ बसपा की डील और सत्ता के दुरुपयोग की वजह से उनका प्रत्याशी हारा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की तैयारियों को देख बसपा डर गई है। क्योंकि विस चुनाव में भाजपा-बसपा की ही टक्कर होनी है। ऐसे में सपा के साथ डील कर ‘वॉक ऑवर’ दे दिया। भाजपा ने सपा के प्रत्याशी को निर्विरोध जीतने का रास्ता रोका। बाबूलाल का कहना है कि वर्ष 2017 में यह पद उन्हीं की झोली में होगा। इधर, रामप्रताप सिंह का कहना है कि अगले विधानसभा चुनाव में बसपा को सपा के साथ यह सेटिंग भारी पड़ेगी।
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