चंबल नदी के कैंजराघाट पर पांटून पुल का निर्माण कार्य आखिरी चरण में
बाह। उत्तर प्रदेश के बाह एवं मध्य प्रदेश के भिंड के बीच चंबल नदी के कैंजराघाट पर पीपों के पुल का निर्माण कार्य आखिरी चरण में है। मकर संक्रांति तक दोनों राज्यों के 150 गांव के लोग पुल के रास्ते आवागमन शुरू कर सकेंगे। फिलहाल मोटर बोट के सहारे नदी को पार कर आ जा रहे हैं।
कैंजरा एवं उद्योतगढ़ के बीच 15 अक्तूबर से पीपों का पुल चालू होना था, जो अब तक नहीं बन सका है। लोक निर्माण विभाग की ओर से वन विभाग से पुल निर्माण की अनुमति की प्रक्रिया में देरी हुई। विधायक पक्षालिका सिंह के हस्तक्षेप के बाद पुल का निर्माण ढाई महीने देरी से शुरू हो सका। फिलहाल नदी में पीपे लगाए गए हैं। ज्वाइंट भी हो गए हैं। दोनों ओर पुल के सहारे के लिए सपोर्ट सिस्टम बनाया जा रहा है। सपोर्ट सिस्टम तैयार होते ही स्लीपर बिछाने का काम शुरू होगा। ठेकेदार चंद्रसेन तिवारी ने बताया पुल निर्माण का काम आखिरी चरण में है। मकर संक्रांति तक पुल पर आवागमन शुरू हो जाएगा। फिलहाल दोनों राज्यों के बीच चंबल नदी पार कराने के लिए मोटर बोट का संचालन हो रहा है। चंबल नदी के कैंजराघाट पर पुल के जरिए आवागमन बंद होने से भिंड और मुरैना, आगरा, फिरोजाबाद के 150 गांवों के लोग प्रभावित हैं। पीपों का पुल न होने की वजह से मुरैना के लिए धौलपुर के रास्ते एवं भिंड के लिए ऊदी के रास्ते जाने को मजबूर लोगों को 40 से 90 किमी तक अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ रही है। पुल बनने से समय और धन की बचत होगी। मोटर बोट से केवल नदी को पार कर सकते हैं। सामान लाने, ले जाने के लिए ग्रामीण पुल का इंतजार कर रहे हैं। पुल निर्माण शुरू होने पर भाजपा कोर कमेटी के सदस्य पवन भदौरिया, सुरेश पचौरी, हृदय नरायन शर्मा, कृष्णकांत भदौरिया, पुलकित भदौरिया, सुशील भदौरिया, अल्केन्द्र जादौन आदि ने विधायक पक्षालिका सिंह का आभार जताया है।
चंबल नदी के कैंजराघाट पर पांटून पुल का निर्माण कार्य आखिरी चरण में