तीन महीनों के बाद किसानों के सामने खाद का संकट खड़ा हो सकता है। केंद्र सरकार ने हाल में जारी की गई नई उर्वरक नीति में माल-भाड़े पर दी जा रही सब्सिडी को वापस ले लिया है। इससे उर्वरकों की आपूर्ति महंगी हो जाएगी। नई नीति में कई अन्य बदलावों से फर्टिलाइजर डीलर और कंपनियां रबी की फसल के दौरान आपूर्ति का संकट मान रही हैं। आगरा फर्टिलाइजर डीलर्स एसोसिएशन के 25 वें स्थापना दिवस पर फर्टिलाइजर से जुड़े मुद्दों पर चिंतन किया।
ताजनगरी स्थित होटल डबल ट्री में आयोजित स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ जिला कृषि अधिकारी गणेश प्रसाद दुबे ने किया। एसो. अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ गुप्ता और मनीष अग्रवाल ने उर्वरक क्षेत्र में आ रही दिक्कतें गिनाईं। उन्हाेंने कहा कि यमुना किनारा रोड शनिवार-रविवार को ट्रकों के लिए बंद किया जा रहा है। इससे खाद की आपूर्ति थम रही है। यमुना ब्रिज से रैक आने पर भी दो दिन देरी हो रही है। आरबीएस कालेज के पूर्व विभागध्यक्ष डा. विनय सिंह ने कहा कि उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग के प्रति किसानों को जागरूक किया जाए। हर खेत का मृदा परीक्षण हो। खाद कंपनियों से आए अधिकारियों ने नई नीति पर कहा कि 30 में से 17 उर्वरक फैक्ट्रियां नुकसान में हैं। 100 फीसदी मालभाड़ा सब्सिडी बंद कर दी गई है। इससे कंपनियां वहीं माल बेचेंगी, जहां भाड़ा कम है। डीएपी पर 2400 रुपये प्रति टन का भाड़ा बढ़ जाएगा।
सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए फर्टिलाइजर डीलर्स एसोसिएशन ने मंदबुद्धि संस्थान टीयर्स की निदेशिका डा. रीता अग्रवाल और एसो. अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ गुप्ता को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में उप निदेशक कृषि ओपी सिंह, बालक दास, शैलेंद्र सिंह सहित किशोर अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, अजीत बंसल, अमित गुप्ता, महेश वार्ष्णेय, राजीव गुप्ता, जितेंद्र कुमार, राजेंद्र अग्रवाल, राकेश अग्रवाल मौजूद रहे। संचालन मुकेश अग्रवाल ने किया।
इन मुद्दों पर मंथन
- नई उर्वरक नीति में सब्सिडी के लिए एमएफएमएस प्रणाली से रिटेलरों की दिक्कत बढ़ी
- खेती के सीजन में रेलवे में प्राथमिकता क्षेत्र खत्म होना चाहिए
- यमुना ब्रिज रैक प्वाइंट पर रात आठ बजे के बाद लगने वाले चार्ज खत्म किए जाएं
- शनिवार और रविवार को नो एंट्री हटाई जाए, इससे खाद के ट्रक रुकने से आपूर्ति का संकट
- हर खेत का सॉइल हेल्थ कार्ड बनाया जाए, जिससे संतुलित उर्वरक ही प्रयोग हों
- सीजन में खाद की किल्लत टालने के लिए ज्यादा रैक मंगाए जाएं, कोट बढ़वाया जाए
- एनपीके, एसएसपी, कस्टमाइज खादों के प्रयोग को प्रोत्साहन दिया जाए
- 75 फीसदी खाद की खपत आगरा में 20 दिनों में, तब खाद की आपूर्ति पूरी की जाए