आगरा। पशुपालन विभाग के भीतर एक बड़े वित्तीय घोटाले और तानाशाही का मामला सामने आया है। महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबीरानी मौर्य ने प्रमुख सचिव (पशुधन) को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ. डीके पांडेय के खिलाफ घोटाले की जांच के आदेश दिए हैं।
डिप्लोमा वेटनेरियन एसोसिएशन यूपी के अध्यक्ष डॉ. सतीश चंद्र शर्मा की ओर से मंत्री को सौंपे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया था कि डॉ. पांडेय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में नियम-कानूनों को ठेंगा दिखाकर करोड़ों की मनमानी खरीदारी कर डाली। दावा किया गया कि इस दौरान जिला क्रय समिति के माध्यम से अपनाई जाने वाली खरीद प्रक्रिया को भी नजरंदाज किया गया। साथ ही बजट का भी दुरुपयोग किया गया।
शिकायत में लगे आरोपों को गंभीर मानते हुए मंत्री ने प्रमुख सचिव को जांच के लिए पत्र लिख दिया है। मंत्री का कहना है कि मामला प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस व वित्तीय पारदर्शिता की नीति के पूरी तरह विपरीत है। यदि बिना जिला क्रय समिति की स्वीकृति के करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं तो यह वित्तीय नियमों का खुला उल्लंघन है। प्रमुख सचिव पशुधन को मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराकर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।