बटेश्वर मंदिर परिसर मे भगवत कथा श्रवण कराती साध्वी श्रद्धा किशोरी कथा पंडाल मे कथा श्रवण करते
बटेश्वर। प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल बटेश्वर के मंदिर परिसर स्थित यात्री विश्राम गृह में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा व्यास साध्वी श्रद्धा किशोरी ने वराह अवतार, कर्दम-देवहूति विवाह, कपिल भगवान के अवतार और ध्रुव चरित्र के प्रसंगों का मार्मिक वर्णन किया।
श्रीमद्भागवत महिमा का बखान करते हुए कथा व्यास ने बताया कि जब हिरण्याक्ष पृथ्वी को पाताल लोक ले गया, तब भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर उसका वध किया और सृष्टि की रक्षा की। अधर्म और अहंकार की आयु हमेशा छोटी होती है। अंततः जीत धर्म की ही होती है।कथा में आगे कपिल भगवान द्वारा माता देवहूति को दिए गए भक्ति व ज्ञान के उपदेशों को साझा किया गया। साथ ही, पांच वर्षीय बालक ध्रुव के चरित्र के माध्यम से पंडाल में मौजूद अभिभावकों को प्रेरित किया गया कि वे अपने बच्चों को बचपन से ही अच्छे और धार्मिक संस्कार दें। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। पूरा पंडाल भगवान के जयकारों से गूंज उठा। मुख्य यजमान नेत्रपाल और यज्ञपति कृष्णकांत (हरिया) ने सपरिवार मुख्य आरती में भाग लिया। अंत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।