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Agra News: धरना खत्म कराने पहुंचे कोतवाल को वकीलों ने सुनाई खरी-खोटी

Fri, 21 Jun 2024 11:13 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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मैनपुरी। अधिवक्ताओं पर हो रहे अत्याचार के मामलों में कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर दो दिन से अधिवक्ता धरना दे रहे हैं। शुक्रवार को बार एसोसिएशन सभागार में चल रहे धरने में कोतवाल फतेह बहादुर सिंह धरना खत्म कराने पहुंचे। जैसे ही उन्होंने अधिवक्ता पर हमले की बात को झूठा बताया तो साथी अधिवक्ता नाराज हो गए। उन्होंने कोतवाल को खूब खरी-खोटी सुनाईं। इसके बाद कोतवाली उल्टे पांव वापस लौट आए। अधिवक्ता शनिवार को धरना देने के साथ ही पैदल मार्च निकालेंगे।
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कलेक्ट्रेट के तीन अधिवक्ताओं के मामलों में पुलिस की ओर से कार्रवाई न करने और प्रशासन द्वारा गलत कार्रवाई करने से वकील आक्रोशित हैं। उनका आरोप है कि अधिवक्ता बलवीर सिंह पर झूठा मुकदमा पुलिस ने एक उद्योगपति के दबाव में पंजीकृत किया। इसके साथ ही अधिवक्ता अवनीश सक्सेना के परिवार पर हुए हमले की एफआईआर दर्ज नहीं की। उल्टा एसडीएम सदर अभिषेक कुमार ने मौके पर जाकर बुलडोजर से उसकी छज्जा तुड़वा दिया। वहीं तीसरा मामला अधिवक्ता रामपाल से जुड़ा है। उनकी बेटी को प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। इन्हीं तीन मामलों को लेकर कलेक्ट्रेट के अधिवक्ता बृहस्पतिवार से धरना दे रहे हैं।
शुक्रवार को धरना जारी रहा। दोपहर बाद कोतवाल फतेह बहादुर सिंह धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने अधिवक्ताओं से वार्ता करते हुए अवनीश सक्सेना के परिवार पर हमले के मामले को झूठा बताया। इससे वकील नाराज हो गए। बलवीर सिंह पर दर्ज फर्जी मुकदमे के मामले में भी वे कोई जवाब नहीं दे सके।
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बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सवेंद्र यादव ने बताया कि शनिवार को भी धरना जारी रहेगा। धरने के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में पैदल मार्च भी निकाला जाएगा। धरने में अधिवक्ता संजीव यादव, देवेंद्र सिंह यादव, आशीष सक्सेना, अभिषेक मिश्रा, अवनीश सक्सेना, रामपाल यादव, बलवीर सिंह, सौरभ पांडेय, अशोक दीक्षित समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
पुलिस प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं से जुड़े मामलों में गंभीरता न बरते जाने से उनका आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। शुक्रवार को धरना देने से पूर्व अधिवक्ताओं ने वकीलों के सभी कमरों में ताले लगवा दिया। इसके चलते वादकारियों को बैठने को बैठने के लिए भी जगह नहीं मिली। बाहर ही धूप में वादकारी भटकते नजर आया। वहीं न्यायालयों में भी काम-काज ठप रहा।
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