पिनाहट। बीहड़ की खामोशी में बुधवार शाम अचानक गूंजी एक चीख ने मां की ममता को फौलाद बना दिया। झाड़ियों से झपटे खूंखार सियार के चंगुल में फंसे अपने तीन वर्षीय कलेजे के टुकड़े को देख मां ने खुद की जान की परवाह किए बिना मौत के मुंह से अपने लाल की सांसें छीन लीं।
कस्बे के मोहल्ला मार (गोपाल सागर कुआं) निवासी राजकुमारी पत्नी मनोज अपने बेटे प्रिंस (3) को लेकर पशुओं के लिए चारा काटने कगार से सटे इलाके में गई थीं। वे दरांती चला रही थीं और प्रिंस पास की पगडंडी पर खेल रहा था। इसी बीच घात लगाए बैठे सियार ने झपट्टा मारा और बच्चे के सिर को जबड़े में जकड़कर बीहड़ की ओर खींचने लगा।
चीखने की आवाज कान में पड़ते ही राजकुमारी ने आव देखा न ताव, हाथ में जो डंडा आया उसे लेकर सियार पर टूट पड़ीं। डंडे के लगातार प्रहार से बच्चे को लहूलुहान हालत में छोड़कर वह भाग निकला। गंभीर हालत में बेटे को सीने से चिपकाए परिजन बदहवास स्थिति में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और इलाज कराया।
सियार के हमले में घायल तीन वर्षीय बच्चे को अस्पताल लाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को एंटी रेबीज वैक्सीन और जरूरी सीरम लगाया गया है। अब उसकी हालत स्थिर और खतरे से बाहर है।
- डॉ. प्रमोद कुमार, प्रभारी, सीएचसी पिनाहट
शिकार की तलाश में जंगली जानवर अक्सर बीहड़ से निकलकर खेतों तक आ जाते हैं। ग्रामीण शाम के समय खेतों पर जाते वक्त लाठी-डंडे और टॉर्च जरूर साथ रखें। चरवाहों और छोटे बच्चों को कगार व जंगल के किनारे बिल्कुल न जाने दें।
- कुलदीप सहाय पंकज, रेंजर, बाह चंबल सेंचुरी
बरतें ये सावधानियां
- शाम ढलने या रात के समय खेतों पर सिंचाई अथवा रखवाली के लिए अकेले जाने से बचें। हमेशा दो या तीन लोगों के समूह में ही जाएं।
- अंधेरे में निकलते वक्त हाथ में मजबूत लाठी-डंडा और पर्याप्त रोशनी वाली टॉर्च अवश्य रखें। समय-समय पर आवाज या शोर करते रहें ताकि जानवर दूर रहें।
- छोटे बच्चों और बुजुर्गों को शाम के समय बीहड़ या कगार से सटे खेतों, पगडंडियों और झाड़ियों की तरफ बिल्कुल न जाने दें।
- खेतों के आसपास उगी घनी झाड़ियों और खरपतवार की छंटाई करें, क्योंकि जंगली जानवर अक्सर घात लगाने के लिए इन्हीं झाड़ियों की आड़ लेते हैं।
- रात में खेतों पर रुकते समय एक निश्चित दूरी पर अलाव जलाएं या सोलर लाइट की व्यवस्था रखें, क्योंकि आग और तेज रोशनी से जानवर नजदीक नहीं आते।
- क्षेत्र में किसी भी जंगली जानवर की गतिविधि दिखने या हमले की स्थिति में तुरंत वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचित करें, खुद जानवर से उलझने का जोखिम न उठाएं।