आगरा। मौसम में बदलाव से लोगों में वायरल फीवर की परेशानी बढ़ी है। एसएन मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। तेज बुखार, खांसी-खराश के साथ गले, मांसपेशियों और सिर में दर्द हो रहा है। हालत खराब होने पर मरीजों को भर्ती भी करना पड़ रहा है।
बाल रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नीरज यादव ने बताया कि मौसम में बदलाव और उमस भरी गर्मी के दौरान बच्चे बाहर का ठंडी सामग्री भी खा-पी रहे हैं। इससे वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ओपीडी में आए बच्चों में 60 फीसदी इसी परेशानी से ग्रसित हैं। इनको तेज बुखार, गले में दर्द, सूजन, सिर में दर्द की परेशानी हो रही है। पीलिया के भी मरीज आ रहे हैं। हालत खराब मिलने पर 8-12 बच्चों को भर्ती भी कर रहे हैं।
मेडिसिन विभाग के डॉ. अजित चाहर ने बताया कि मेडिसिन विभाग में 604 मरीज आए। इनमें से बीते दो सप्ताह में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ गई है। इसमें बुखार, सिर दर्द गले में खराश-दर्द और भोजन निगलने में दिक्कत महसूस होती है। कमजोरी और थकान अधिक महसूस हो रही है। जांच कराने पर मरीजों की प्लेटलेट्स भी कम मिल रही हैं। लक्षण दिखने पर शुरू में ही दवाएं लेने से 3-5 दिन में परेशानी ठीक हो रही है।
खुजली, चकत्ते और टूट रहे बाल
त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र सिंह चाहर ने बताया कि उमस-गर्मी में पसीना अधिक आ रहा है। इससे फंगल संक्रमण बढ़ रहा है। धूप से एलर्जी, चकत्ते भी हो रहे हैं। ये गर्दन और चेहरे समेत खुले स्थानों पर ज्यादा बन रहे हैं। उमस से ऊपर त्वचा गीली होने से बालों की जड़ें कमजोर होने पर ये टूट रहे हैं। दवा देने के साथ बचाव के लिए भी मरीजों को जागरूक कर रहे हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
खुले और गंदगी में बनने वाली बाहरी सामग्री खाने-पीने से बचें।
बुखार आने पर पैरासिटामॉल लें, आराम न मिलने पर डॉक्टर को दिखाएं।
बच्चों को पानी उबालने के बाद ठंडा कर पिलाएं।
रेफ्रिजरेटर में रखे बासी भोजन, गले और कटे फल खाने से बचें।