साइबर क्राइम थाना पुलिस की पकड़ में आए मर्चेंट नेवी के पूर्व कैप्टन नागेश कुमार से पूछताछ में कई जानकारी हाथ लगी हैं। उसने नौकरी छोड़कर चंडीगढ़ में अपनी खुद की प्लेसमेंट एजेंसी खोली थी। वह कम पढ़े-लिखे युवाओं को विदेश में होटल और रियल एस्टेट कंपनी में नौकरी का झांसा देकर तीन से चार लाख रुपये लेता था। भारत से टूरिस्ट वीजा पर सभी बैंकॉक भेजे जाते थे। वहां कई एजेंट अवैध तरीके से बॉर्डर पार कराकर कंबोडिया में चीनी कंपनियों को बेच देते थे। आरोपी पांच साल में 100 से अधिक लोगों को विदेश भेज चुका है। शुक्रवार को कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
साइबर स्लेवरी के मामले में पुलिस ने बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले नागेश कुमार को गिरफ्तार किया था। वह पूर्व में दर्ज मामले में वांछित था। उसके तीन साथी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके थे। कई दिन से पुलिस नागेश की तलाश में लगी हुई थी। पुलिस की पूछताछ में आरोपी नागेश कुमार ने बताया कि वह इंटरमीडिएट पास है। बाद में उसने मुंबई में मर्चेंट नेवी का कोर्स किया था। वर्ष 2014 में उसकी नौकरी लग गई थी।
इस दौरान वह बैंकॉक, वियतनाम, कंबोडिया आदि देशों में रहा था। तभी उसकी मुलाकात मर्चेंट नेवी में ही कार्यरत आतिफ खान उर्फ रॉनी से हुई थी। तब उसे पता चला कि भारत के कई युवा नौकरी की तलाश में विदेश में बैठे एजेंट से संपर्क करते हैं। एजेंट उन्हें अलग-अलग कंपनियों में नौकरी लगवाने के बदले लाखों रुपये लेते हैं।
इसके बाद उसने वर्ष 2017 में नौकरी छोड़ दी। चंडीगढ़ आकर खुद की प्लेसमेंट एजेंसी चलाने लगा। इसमें वह मर्चेंट नेवी में नौकरी लगवाने का दावा करता था। उसके बदले में 40 से 50 हजार तक कमीशन लेता था। बाद में उसे पता चला कि विदेश में बैठे एजेंट भारत से जाने वाले युवाओं को चाइनीज कंपनी के एजेंट को सौंप देते हैं। इसके बदले में उन्हें काफी रकम मिल जाती है।
इन कंपनियों में लड़कों से साइबर ठगी कराई जाती है। वर्ष 2021 में उसने इस बारे में आतिफ खान से बात की। उसने नागेश का कमीशन तय कर दिया। तब से ही नागेश लोगों को विदेश भेज रहा था। अब तक 100 से अधिक को बैंकॉक और वियतनाम भेज चुका है। इसके लिए टूरिस्ट वीजा बनवाया जाता था।