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Agra News: तहसीलदार न्यायालय से दाखिल खारिज की फाइल गुम

Tue, 23 Sep 2025 01:39 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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मैनपुरी। फर्जी बैनामा के बाद दाखिल खारिज की फाइल तहसीलदार न्यायालय से ही गायब हुई है। तहसीलदार घिरोर द्वारा की गई जांच में अमर उजाला की खबर पर मोहर लगी है। जांच में दाखिल खारिज की फाइल का मुकदमा नंबर भी फर्जी पाया गया है। तहसीलदार घिरोर के तत्कालीन पेशकार को दोषी पाए जाने के बाद जांच रिपोर्ट के आधार
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पर एसडीएम घिरोर द्वारा डीएम को भेजी गई आख्या में तत्कालीन पेशकार के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति मांगी गई है। भावना स्टेट, थाना सिकंदरा (आगरा के) के निवासी रीवन सिंह ने आयुक्त आगरा मंडल से शिकायत कर बताया कि तहसीलदार घिरोर के न्यायालय में मृतक रघुवीर सिंह के नाम से फर्जी वाद संख्या टी 201601490313 दायर कर दाखिल खारिज कराने के बाद फाइल ही गायब करा दी गई है। आयुक्त ने डीएम को जांच कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद डीएम के आदेश पर तहसीलदार घिरोर ने मामले की जांच की।इस संबंध में अमर उजाला
ने 29 अगस्त और 8 सितंबर को समाचार का प्रकाशित किया था। तहसीलदार कमलेश कुमार ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा कि जिस पत्रावली के संबंध में शिकायत की गई है उसको पहले तो न्यायालय तहसीलदार घिरोर के न्यायालय में खोजा गया लेकिन वह न्यायालय में नही मिली। इस पत्रावली की तलाश अभिलेखागार मैनपुरी में भी की गई लेकिन यह वहां भी नहीं थी। तहसीलदार ने जांच आख्या में लिखा कि वाद संख्या टी 201601490313 को पोर्टल पर जांचा गया तो पता चला कि उक्त वाद न्यायालय तहसीलदार भोगांव के न्यायालय में रंजीत बनाम मिथलेश के नाम से दर्ज है। इससे यह प्रतीत होता है कि यह वाद तहसीलदार घिरोर के न्यायालय से संबंधित ही नहीं था। फिर किस प्रकार इस वाद संख्या से तहसीलदार घिरोर के न्यायालय में वाद दर्ज हुआ और आदेश किया गया। जांच आख्या में तहसीलदार ने लिखा कि यह आदेश तहसील घिरोर के आर-6 रजिस्टर पर भी अंकित है। इससे यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय तहसीलदार घिरोर के तत्कालीन पेशकार द्वारा ही उक्त पत्रावली का आदेश रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय को उपलब्ध कराया गया। रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय द्वारा आदेश को खतौनी पर दर्ज किया गया।तहसीलदार घिरोर की जांच रिपोर्ट के अनुसार प्रथम दृष्टया तत्कालीन पेशकार राजेश सक्सेना दोषी प्रतीत होते हैं। उनके द्वारा ही उक्त पत्रावली को तैयार किया गया। उनके द्वारा ही तत्कालीन तहसीलदार से आदेश कराया गया। तत्कालीन पेशकार राजेश सक्सेना अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। राजेश सक्सेना को 4 और 16 सितंबर 2025 को नोटिस भी भेजे गए। पत्रावली के संबंध में जवाब मांगा गया लेकिन इसका भी उत्तर नहीं दिया गया। एसडीएम घिरोर प्रसून कश्यप द्वारा तहसीलदार घिरोर की जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 सितंबर को डीएम को आख्या भेजी गई है। आख्या में कहा गया है कि इस मामले में तत्कालीन पेशकार राजेश सक्सेना दोषी प्रतीत होते हैं। वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं ताकि शिकायत पर कार्रवाई की जा सके।
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