अछनेरा। विकास खंड अछनेरा के अंतर्गत करीब 146 परिषदीय विद्यालयों में छह वर्ष में घटती छात्र संख्या और शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर एक बार फिर बड़ा संकट सामने आया है। कभी मुफ्त शिक्षा, मिड-डे मील और मुफ्त यूनिफॉर्म के भरोसे चलने वाले सरकारी स्कूलों से अब अभिभावकों का भरोसा डगमगा गया है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में 19615 नामांकन दर्ज थे लेकिन वर्ष 2026 में करीब 12675 नामांकन दर्ज हुए है जिस कारण करीब पांच वर्ष में 6940 छात्र एवं छात्राएं कम हुए है जिसमें अभिभावकों ने सरकारी स्कूलों से नाम कटवाकर प्राइवेट स्कूलों में दाखिला करवा दिया है।अभिभावकों का सीधा आरोप है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों द्वारा बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और लगातार उनकी अनदेखी की जा रही है।
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मजबूरी में उठाना पड़ा कदम
अभिभावकों का दर्द अपने दो बच्चों का नाम सरकारी स्कूल से निकालकर पास के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने वाले कहते हैं हम गरीब लोग हैं प्राइवेट की फीस देना हमारे लिए मुश्किल है। लेकिन सरकारी स्कूल में मास्टर साहब आते हैं और सभी शिक्षक बैठ कर चले जाते हैं बच्चे दिनभर खेलते रहते हैं। जब बच्चे का भविष्य ही नहीं बनेगा तो ऐसी मुफ्त शिक्षा का हम क्या करेंगे यह कहानी अकेले हरिओम, रामेश्वर, वीरेंद्र की नहीं है बल्कि उन हजारों अभिभावकों की है जो अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब प्राइवेट स्कूलों की फीस में झोंकने को मजबूर हैं।
बुनियादी सुविधाएं हैं लेकिन कक्षा से गायब है पढ़ाई
सरकार द्वारा कायाकल्प योजना के तहत स्कूलों की इमारतों को चमकाया गया है बाउंड्री वॉल बनी हैं और रंगाई और पुताई भी हुई दीवारों पर लिखा गया पढ़ाई है तो कल है, हर घर बेटी पढ़ेगी लेकिन अभिभावकों का कहना है कि सिर्फ दीवारें चमकाने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरता। स्कूलों में शिक्षकों की गैर-हाजिरी, शिक्षक राजनीति में समय पर क्लास न चलना और बच्चों की कॉपियां तक न जांचे जाना आम बात हो चुकी है। शिक्षकों की इसी अनदेखी ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के अभिभावकों को निराश किया है।
इन स्कूलों में हुई छात्र संख्या ज्यादा कम
ज्यादातर इन स्कूलों में काफी संख्या में छात्र कम हुए अभेदोपुरा कम्पोजिट, धनौली कम्पोजिट, मांगरोल जाट कम्पोजिट,प्राथमिक विधायक साधन,प्राथमिक अभूआपुरा, प्राथमिक जनूथा, प्राथमिक गुलाब नगर, वाकन्दा खास कम्पोजिट ज्यादातर सभी स्कूलों से कम हुई छात्र संख्या।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
इस मामले पर जब खंड शिक्षा अधिकारी सौरभ आनंद से बात की गई तो उन्होंने कहा मामला संज्ञान में आया है। जिन स्कूलों से बड़े पैमाने पर बच्चों के नाम कटे हैं, वहां के प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। शिक्षकों की उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता की जांच के लिए औचक निरीक्षण बढ़ाए जाएंगे। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन प्राइवेट स्कूल ज्यादा खुल जाने से दिक्कत आई है।