आगरा। घनी आबादी क्षेत्र में पुलिस चौकी के सामने कई वर्षों से जूते की फैक्टरी संचालित हो रही थी। इसके पास अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी नहीं थी। फैक्टरी में गोदाम भी था। इसके बाद भी किसी जिम्मेदार की इस पर नजर नहीं पड़ी।
यह हाल तब है जब गर्मी का मौसम शुरू होते ही जूते की फैक्टरियों में आग लगने की घटनाएं हर वर्ष सामने आती हैं। स्थानीय निवासी सलमान कुरैशी ने बताया कि वह सुबह नौ बजे मित्र के पास जाने के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान फैक्टरी से धुआं निकलते देखा और राहत कार्य करने का प्रयास किया। फैक्टरी काफी समय से संचालित हो रही है। रोजाना 100 से 150 के करीब कर्मचारी काम करने आते हैं।
अंदर ही जूता बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला फोम, चमड़ा, सोल, थर्माकोल, जूता चिपकाने, फिनिशिंग और पॉलिश में इस्तेमाल होने का केमिकल गोदाम में रखा था। गनीमत थी कि छुट्टी होने से कोई कर्मचारी नहीं आया था। फैक्टरी के गेट काफी छोटे हैं। आगे का हिस्सा छोड़कर शेष पूरी बिल्डिंग पुरानी है। उसमें पुराने पत्थर और गर्डर लगे हैं। धमाके के कारण बिल्डिंग के पत्थर गिरने लगे थे। पीछे के हिस्से की छत का काफी हिस्सा ढह गया।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
आग लगने की सूचना पर वह फायर ब्रिगेड टीम के साथ खुद मौके पर पहुंचे थे। आठ गाड़ियों को आग बुझाने में लगाया गया। मौके पर आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं मिले। आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - देवेंद्र कुमार, सीएफओ