आगरा। जिले में दस साल से धूल फांक रही अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्ट्रीट कैफे निर्माण की फाइल एक बार फिर बाहर आ गई है। स्ट्रीट कैफे के लिए रक्षा विभाग से भूमि की अदला-बदली का प्रस्ताव जिलाधिकारी ने रक्षा मंत्रालय को भेज दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में 35 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी योजना बीते दस साल से बजट और जमीन के पेंच में उलझी हुई है। विकास प्राधिकरण की पहल पर जिलाधिकारी ने रक्षा संपदा अधिकारी को भूमि विनिमय का प्रस्ताव भेज दिया है, जिससे इस प्रोजेक्ट के दोबारा परवान चढ़ने की उम्मीद जगी है। रक्षा मंत्रालय की जमीन के विनिमय (अदला-बदली) का रास्ता अब साफ होता दिख रहा है।
प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में बार-बार यह मुद्दा उठ रहा था। मंडलायुक्त के निर्देश के बाद इस मामले में तेजी आई है। जिलाधिकारी ने बताया है कि स्ट्रीट कैफे के निर्माण में प्रयुक्त रक्षा मंत्रालय की भूमि के संबंध में 6 अप्रैल, 2026 को एलएमएस पोर्टल पर प्रस्ताव रक्षा संपदा अधिकारी को भेजा जा चुका है।
वर्ष 2016 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
वर्ष 2016 में तत्कालीन सपा सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस योजना की घोषणा की थी। 35 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 7120 वर्ग मीटर में बनने वाले इस प्रोजेक्ट का काम अक्तूबर 2016 में शुरू भी हो गया था और इस पर करोड़ों रुपये खर्च भी हो गए थे। ईंट और लोहे के गर्डर से करीब 20 फीसदी ढांचा तैयार हो चुका था लेकिन 2017 के विधानसभा चुनावों ने इस पर ब्रेक लगा दिया। चुनाव के बाद हुए सत्ता परिवर्तन और बजट के अभाव में यह काम दस साल से अधूरा पड़ा है।
पर्यटकों को मिलता सुकून का ठिकाना
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत दो रेस्तरां, फूड स्टॉल, पवेलियन सहित बच्चों के लिए गेमिंग जोन और झूले बनाए जाने थे। इसका मुख्य उद्देश्य आगरा आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को स्मारकों के दीदार के बाद परिवार के साथ सुकून भरे पल बिताने के लिए एक बेहतरीन स्थान उपलब्ध कराना था। अब जमीन का पेंच सुलझने की दिशा में कदम बढ़ने से शहर के पर्यटन कारोबारियों में प्रोजेक्ट पूरा होने की आस फिर से बंध गई है।