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शहर में हैं जर्जर इमारतें, बारिश में ढहने का रहता है खतरा

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मैनपुरी। आगामी दिनों में मानसून दस्तक देगा। ऐसे में जिले की जर्जर इमारतों के ढहने का खतरा बढ़ जाएगा। शहर में जगह-जगह जर्जर इमारतें खड़ी हैं। कभी भी इमारतें हादसे का सबब बन सकती हैं। कार्रवाई के नाम पर नगर पालिका प्रशासन इमारतों के स्वामियों को नोटिस भर जारी करता है। बीते वर्षों में इससे आगे नगर पालिका की कोई कार्रवाई नहीं बढ़ी। जर्जर अधिकांश इमारतें भीड़भाड़ वाले इलाकों में हैं। ऐसे में कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।
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एक साल में भी नहीं हुई कार्रवाई
वर्ष 2020 में नगर पालिका ने 27 जर्जर इमारतों को जर्जर चिह्नित कर मालिकों को नोटिस जारी किए। लोगों के जीवन के खतरे के मद्देनजर जर्जर इमारतों को गिराने का कहा गया था। इमारतें नहीं गिराने पर पालिका ने खुद जर्जर भवन गिराने की चेतावनी दी थी। हालांकि एक साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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नटराज होटल गली
स्टेशन रोड से नटराज होटल वाली गली में घुसते ही जर्जर इमारत है। इस इमारत के नीचे कई दुकानें हैं। पूरे दिन इस मार्ग पर राहगीरों लोगों और वाहन सवारों का आना जाना होता है। यदि इमारत को बारिश में नुकसान हुआ तो बड़ा हादसा हो सकता है।
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मंडी धर्मदास मार्ग
शहर के बीच मंडी धर्मदास के लिए जाने वाली सड़क के दोनों और कई दुकानें और मकान हैं। मंडी धर्मदास का मुख्य द्वार काफी जर्जर हाल में है। इस मार्ग पर पूरे दिन खरीदारों की भीड़ रहती है। बरसात होने पर इस द्वार से अक्सर ही मलबा गिरता है।
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सिटी पोस्ट ऑफिस के पास
सदर बाजार में सिटी पोस्ट ऑफिस के पास भी एक जर्जर इमारत है। इस इमारत के नीचे पांच दुकानें हैं। इन दुकानों पर हर समय खरीदारी के लिए लोग पहुंचते हैं। बरसात के दिनों में इन दुकानों पर खतरे के बीच भी लोग पानी से बचने को शरण पाते हैं।
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बाटा वाली गली
संता बसंता चौराहे से छपट्टी की ओर जाने वाली बाटा वाली गली में दिनरात चहल पहल रहती है। गली में सड़क किनारे का एक जर्जर भवन लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। बारिश होने पर हर साल इस इमारत की दीवार से मलबा सड़क पर गिरता रहता है।
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शहर में जर्जर भवनों को चिह्नित कर उनके मालिकों को भवन गिराने के लिए अंतिम नोटिस दिया जाएगा। निर्धारित समय में यदि भवन नहीं गिराए जाते हैं अथवा मानक अनुसार मरम्मत नहीं कराई जाती है तो पालिका खुद ऐसी इमारतों को गिराएगी। गिराने पर आने वाला खर्चा मालिक से ही वसूला जाएगा।
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लालचंद्र भारती, अधिशासी अधिकारी
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