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Agra News: वाटरप्रूफ नहीं होते पन-कौआ के पंख, फिर भी चंबल में डूब कर पकड़ लेता है मछली

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बाह: चंबल नदी में मछली का ​शिकार करते पन-कौआ का अंदाज
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बाह। पन-कौआ (कॉर्मोरेंट) के पंख वाटरप्रूफ नहीं होते, फिर भी चंबल नदी के पानी में अंदर जाकर अपने शिकार मछली को पकड़ लेता है। पाीन के अंदर मजबूत और जालीदार पैर पतवार का काम करते हैं। पानी के भीतर तेज गति से तैरते हुए चकमा देकर मछलियों को पकड़ लेते हैं। नुकीली और हुकदार चोंच की पकड़ में आने के बाद मछली नहीं छूट पाती है। खास बात ये है कि मछली को जिंदा निगलने की खूबी भी होती है। शिकार के दौरान पंख भीगकर भारी हो जाते हैं, यही वजह है कि शिकार करने के बाद पन-कौआ नदी किनारे के पेड़ की डाली या चट्टान पर बैठ कर दोनों पंखों को फैलाकर हवा और धूप में सुखाते हैं।
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चंबल नदी के जीवों पर नजर रखने वाले वनकर्मी बताते हैं कि पन-कौआ में पानी के भीतर सांस (एक मिनट तक) रोकने की क्षमता होती है। रेहा के प्रधान अजय कौशिक, सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह ने बताया कि चंबल में पानी बढ़ने से पन-कौआ के शिकार की रोमांचक तस्वीरें दिखने लगी हैं। बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि चंबल नदी का साफ पानी जलीय जीवों को भा रहा है। जलचरों की रोमांचक गतिविधियां तटवर्तीय ग्रामीणों को मोहित कर देती हैं। वन विभाग का अमला घड़ियाल, मगरमच्छ से लेकर चिड़ियों के विचरण पर नजर रखे है। संवाद

बाह: चंबल नदी में मछली का शिकार करते पन-कौआ का अंदाज

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