डॉक्टरों ने दी सलाह- रंगों से बनाएं दूरी, और जलन पर लगाए नारियल तेल और मॉइश्चराइजर
आगरा। होली के पर्व से पहले मंगलवार को एसएन मेडिकल कॉलेज की हाफ डे ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ देखने को मिली। इनमें सर्वाधिक मरीज एलर्जी, आंखों में संक्रमण, त्वचा संबंधी समस्याओं और कान-नाक-गले के संक्रमण से पीड़ित रहे।
डॉक्टरों का कहना है कि बीते एक-दो दिनों से मोहल्लों, कार्यालयों और आपसी आयोजनों में होली खेली जा रही है। केमिकल युक्त रंगों और गीले रंगों के प्रयोग से आंखों में जलन, लालिमा, त्वचा पर रूखापन, खुजली और एलर्जी की शिकायतें बढ़ी हैं। साथ ही बदलते मौसम और भीगने के कारण सर्दी-खांसी व गले के संक्रमण के मरीज भी पहुंचे। मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि होली के दौरान भीगने के बाद बच्चों और बड़ों को ठंडा-गरम से परहेज करना चाहिए। यदि कोई भीग जाता है तो तुरंत सूखे कपड़े पहनें और एसी या कूलर के सामने न बैठें, अन्यथा सर्दी-जुकाम और बुखार की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना जरूरी है।
त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र चाहर ने सलाह दी कि केमिकल युक्त रंगों से बचें और प्राकृतिक गुलाल का उपयोग करें। रंग लगाने के बाद यदि त्वचा पर जलन या खुजली हो तो घरेलू उपचार के बजाय चिकित्सक से परामर्श लें। मॉइश्चराइजर और नारियल के तेल का इस्तेमाल करें। रंग छुड़ाने के लिए त्वचा के अनुरूप साबुन या क्लींजर का ही प्रयोग करें और त्वचा को ज्यादा न रगड़ें, इससे त्वचा को नुकसान हो सकता है। संवाद