पर्यावरण को लेकर प्रदूषण विभाग गंभीर नहीं है। विभाग को यह तक नहीं पता कि पशुओं के कटान से बायोमेडिकल वेस्ट निकलता है या नहीं। एक आरटीआई के जवाब में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने जानकारी दी कि पशु वधशाला या मीट की दुकानों से बायोमेडिकल वेस्ट जनित ही नहीं होता। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि प्रदूषण विभाग मिलीभगत केे चलते पशुओं के कटान पर पर्दा डाल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। जबकि इस संबंध में 1998 में ही शासनादेश जारी हो चुका है।
पिछले दिनों एक आरटीआई के सवाल का जवाब देकर यूपीपीसीबी ने चौंका दिया। विभाग से पशु वधशालाओं से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के बारे में जवाब में दिया कि पशुओं के कटान से बायो मेडिकल वेस्ट नहीं निकलता, सारे अंग उपयोग में आ जाते हैं। कोई भाग खुले में नहीं फेंका जाता। जबकि यह जवाब देते वक्त विभाग यह भूल गया कि शासन पशुओं के कटान से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट को अपने एक्ट में शामिल कर चुका है।
विदेशों में भी भेजा जाता मीट
शहर की सीमा में नगर निगम के पांच स्लाटर हाउस हैं। वजीरपुरा, नाई की मंडी, गालीबपुरा, आलमगंज में छोटे स्लाटर हाउस हैं। कुबेरपुर में बड़ा स्लाटर हाउस है। इन पांचों जगह पर कुल मिलाकर पांच सौ से अधिक पशु प्रतिदिन काटे जाते हैं। 250 पशुओं के काटने की अनुमति तो सिर्फ कुबेरपुर स्लाटर हाउस को ही है, जबकि यहां इससे भी ज्यादा पशु काटे जाते हैं। इनका मीट शहर ही नहीं, विदेशों में भी भेजा जाता है।
नहीं होता एंटी पोस्टमार्टम
पशुओं को काटने से पहले उसका एंटी पोस्टमार्टम और पोस्टमार्टम का नियम है। मगर, कुबेरपुर स्लाटर हाउस पर ही एक भी पशु का न तो एंटी पोस्टमार्टम किया जाता और न ही पोस्टमार्टम। हो भी कैसे, नगर निगम में एक ही पशु चिकित्साधिकारी हैं। वह इतने पोस्टमार्टम और एंटी पोस्टमार्टम कर ही नहीं सकते। ऐसी स्थिति में संक्रमित मीट की धड़ल्ले से बिक्री की जा रही है।
पर्यावरण को हो रहा नुकसान
पशुओं के अवैध कटान से पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंच रहा है। मीट निकालने के बाद अपशिष्ट को या तो खुले में फेंक दिया जाता है या फिर नदी में बहाया जाता है। इससे न सिर्फ नदी दूषित हो रही है बल्कि संक्रमण बीमारियां फैलने का भी खतरा बना रहता है।
इनसेट
बायोमेडिकल वेस्ट पर बैठक आज
बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई है। इसमें नगर निगम के अधिकारियों के अलावा पर्यावरण के जानकारों को भी आमंत्रित किया गया है।
वर्जन
कुबेरपुर स्लाटर हाउस को 250 पशुओं के कटान की अनुमति है। निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी समय-समय पर जांच भी की जाती है।
- एके आनंद, क्षेत्री प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, यूपीपीसीबी
पर्यावरण के साथ जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है। पशुओं के कटान से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट खुले में फेंका जा रहा है। संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।
- डीके जोशी, सदस्य, सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण समिति