कासगंज। 22 जनवरी को आयोध्या में रामलला प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर इन दिनों जहां जिले का माहौल राम मय हो चुका है। लोग इस दिन दिवाली मनाने की तैयारियां कर रहे हैं। साथ ही हर तरफ खुशी का माहौल है। वहीं 6 दिसंबर 1992 को विवादित बाबरी ढांचा गिरने के बाद जिले की फिजा एक दम से बदल गई थी। दुकानों के शटर धड़ाधड़ गिरने लगें थे, देखते ही देखते बाजार बंद हो गए थे। सड़कों पर पुलिस ही पुलिस नजर आ रही थी। पुलिस ने धड़पकड़ शुरू कर दी थी। काफी संख्या में गिरफ्तारियां की गई थी।
गली शेरनाथ मंदिर के निकट रहने वाले संजीव गांधी बताते हैं कि जैसे ही बाबरी ढांचा गिरने की खबर आई तो कही खुशी कही गम की स्थिति हो गई थी। पुलिस प्रशासन अलर्ट होकर सड़कों पर नजर आने लगा। माहौल खराब देख दुकानदारों ने अपनी दुकानों के शटर जल्दी गिरा दिए थे। कुल मिलाकर अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात हो गए थे। पुलिस ने सात दिसंबर से गिरफ्तारी भी शुरू कर दी। मुझे भी पुलिस ने घर से गिरफ्तार कर मैनपुरी जेल भेज दिया। 28 दिन जेल में बिताए। पुलिस ने कई अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा। अब जबकि राम लला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है तो मन में काफी खुशी हो रही है।
गली बोहरान निवासी राजीव वार्ष्णेय बताते हैं कि 6 दिसंबर के दिन बाजार में चहल पहल थी। लेकिन लोगों की नजर अयोध्या में होने वाली कार सेवा पर टीकी थी। टीवी, रेडियो के माध्यम से लोग पल-पल की जानकारी ले रहे थे, लेकिन जैसे ही बाबरी ढांचा गिरने की सूचना मिली, माहौल एक दम से बदल गया। बाजार जल्द बंद हो गए। लोग रात को छतों पर जागकर बिताने लगे। पुलिस भी सख्ती बरत रही थी। राम लला प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से मन में काफी खुशी हो रही है।