वादी ने बताया कि उक्त तथ्यों का उल्लेख औरंगजेब के मुख्य दरबारी मुस्तैक खान द्वारा लिखित पुस्तक मासर ई आलमगिरी में है, जिसका अरबी भाषा से अंग्रेजी अनुवाद दुनाथ सरकार ने किया है। इतिहासकार बीएस भटनागर द्वारा लिखित पुस्तक में भी इसका वर्णन मिलता है।
महेंद्र प्रताप सिंह ने अदालत से प्रार्थना की है कि उक्त सीढ़ियों पर लोगों को आने जाने से रोका जाए तथा सीढ़ियों को खुदवाकर उनमें दफन की गई विग्रहों को निकालकर ठाकुर केशव देव मंदिर में स्थापित किया जाए। वादीगण ने बताया कि अदालत ने इसकी अगली सुनवाई के लिए 23 जनवरी को होगी।