वृंदावन (मथुरा)। चैत्र एकादशी से सजने वाला लाडले ठाकुर बांके बिहारी जी का फूलबंगला सोमवार को भी नहीं सज सका। अब सेवायत गोस्वामी और मंदिर प्रबंधन ठाकुर जी के गर्भगृह में ही फूलों की बैठक सजाने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए पुलिस तथा प्रशासन से बातचीत की जा रही है। यदि बातचीत सफल हो जाती है तो दोनों समय गर्भगृह में ही ठाकुर बांके बिहारी महाराज की सुगंधित फूलों की बैठक सजाई जाएगी और उन्हें फूलबंगले का ही एहसास कराया जाएगा।
दरअसल स्वामी हरिदास जी के प्राण प्यारे ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज को लाड़ लड़ाकर ही सेवित किया जाता है। यह कार्य अब स्वामी हरिदास जी के वंशज गोस्वामीगण करते हैं। अब जबकि चैत्र एकादशी से सजने वाले फूलबंगला कोरोना के बंदिशों के कारण नहीं बन पा रहे हैं तो सेवायत गोस्वामीजन तथा घर बैठकर ठाकुर जी के ध्यान में मग्न रहने वाले श्रद्धालुओं के मन द्रवित हैं।
वह चाहते हैं कि ठाकुर जी को फूलबंगला न सही गर्भगृह में ही सिंहासन के चारों और फूलों की बैठक तैयार करा दी जाए। यह बैठक बिहारी जी के सिंहासन के चारों और तैयार कराई जाएगी। इस संबंध में सेवायत नितिन सांवरिया गोस्वामी ने बताया कि प्रबंधतंत्र के साथ मिलकर हम इसे बनवाने के लिए प्रशासन तथा पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। यदि अनुमति मिल जाती है तो वह जल्द ही ठाकुर जी की बैठक तैयार करवाएंगे। वहीं प्रबंधक मुनेश शर्मा ने बताया कि हम कोशिश कर रहे हैं कि बिहारी जी की बैठक फूलों से सजाने की अनुमति मिल जाए तो वह जल्द ही इस सेवा को दोनों समय प्रारंभ कर देंगे।
ये होती है बैठक
बैठक बनाने के लिए अधिक लोगों की आवश्यकता नहीं होती है। यह एक प्रकार का लकड़ी का फ्रेम होता है। जिसे बाहर से ही फूलों से सजा दिया जाता है। इसी फ्रेम को गर्भगृह में ठाकुर जी के सिंहासन के दोनों और सेट कर दिया जाएगा। जिससे ठाकुर जी को गर्मी में फूलों की ताजगी और सुगंध का अहसास होता है।
केवल ब्रज के फूलों से ही बनाई जाएगी बैठक
प्रबंधतंत्र के अनुसार यह बैठक सिर्फ ब्रज के फूलों से ही तैयार कराई जाएगी। जिसका कारण यह है कि बाहर कोरोना का अधिक प्रभाव है यदि बाहर से फूल मंगाए जाते हैं तो उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने के अधिक अवसर होंगे। इसी के चलते अधिक से अधिक फूल बिहारी जी के बगीचे से ही एकत्रित किए जाएंगे। इसके अलावा यदि और फूल चाहिए भी तो आसपास के बगीचों से सैनिटाइज करके लिए जाएंगे।
ठाकुर जी की सेवा में प्रयोग हो रहा गुलाब का इत्र
ठाकुर जी की सेवा में यूं तो 12 महीने किसी ने किसी इत्र की सेवा होती है लेकिन इत्र की सेवा मौसम के हिसाब से बदलती रहती है। गर्मी के कारण अब ठाकुर बांके बिहारी जी की गुलाब के इत्र की सेवा विशेष रूप से की जा रही है। इसके अलावा खस का इत्र भी प्रयोग किया जा रहा है।