मैनपुरी/कुसमरा/करहल। शरद पूर्णिमा पर शहर और कस्बों में हिंदू रीति-रिवाज से टेसू-झांझी का विवाह कराया गया। समारोह में बच्चों ने भाग लिया और विवाह के बाद दान-दहेज देकर विदाई दी। जिले में बच्चों ने आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से टेसू-झांझी खेलते हुए घर-घर से धन मांगकर एकत्र किया। उस धन से बच्चों ने पूर्णिमा को टेसू-झांझी का विवाह रचाया। बुधवार को शाम होते हुए बच्चों का शोर सुनाई देने लगा था। हर कोई बरात की तैयारियों में जुटा था। टेसू वाले घरों में बच्चों की बरात जुट रही थी, तो झांझी के घरों में बरातियों के स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। कुछ देर बाद गलियों में टेसू के बरात की धूम मचने लगी। कहीं बैंडबाजे बज रहे थे, तो कहीं बच्चे बर्तन बजाकर खुशियां मना रहे थे। इस दौरान जमकर आतिशबाजी भी हुई। ग्रामीण अंचल में टेसू महाराज की बारात निकाली गई जहां बच्चों संग बड़ों ने गाजे बाजे पर जमकर नृत्य किया। कुसमरा के कटरा मोहल्ला में बच्चों ने झांझी और टेसू का विवाह धूमधाम के साथ किया। इस अवसर पर बच्चों ने जमकर आतिशबाजी की। एक परिवार के दंपति कन्या पक्ष से अरविंद गोलू, विनोद, मनोज, रविंद्र तो वर पक्ष के धर्मेंद्र रामौतार, रामपाल कश्यप, राजीव कश्यप, मनोज कश्यप, वीरेंद्र बाथम कुलदीप वर्मा शामिल हुए। आचार्य की भूमिका में नरेंद्र दीक्षित ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह संपन्न कराया। करहल के गांव ककवाई के राम जानकी मंदिर परिसर में टेसू-झेंझी का विवाह संपन्न हुआ। पंडित राजकिशोर शुक्ला ने मन्त्रोच्चारण कर विवाह सम्पन्न करवाया। इस अवसर पर अवसर पर लखन, अभिषेक, चांदी, हर्ष, अतुल, शिवा, लव कुश आदि मौजूद रहे।