आगरा। औषधि विभाग ने नकली, सैंपल और सरकारी दवाओं की तस्करी का सिंडिकेट पकड़कर दवाओं के 125 नमूने जांच के लिए लैब भेजे थे। लापरवाही का आलम यह है कि तीन महीने होने जा रहे हैं लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है। इससे आरोपियों पर धाराएं न बढ़ने से कड़ी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने मई से जुलाई के बीच तीन बार छापा मारकर अंतरराज्यीय सिंडिकेट पकड़ा था। आरोप के मुताबिक, ये नकली दवाओं के अलावा सरकारी, सैंपल और एक्सपायर दवाओं की री-लेवलिंग कर कई राज्यों में तस्करी करते थे। टीम ने करीब 90 मेडिकल एजेंसी पर छापा मारकर 3.72 करोड़ रुपये की दवाएं सीज कीं।
इसमें पेट रोग, एंटीबायोटिक, थायरॉइड, एलर्जी, सांस रोग, मधुमेह, जुकाम-खांसी समेत कई मर्ज की दवाएं थीं। इनमें से 125 दवाओं के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए। औषधि विभाग के अधिकारियों ने इनकी जांच प्राथमिकता पर महीने भर में जांच कराने की बात कही। तीन महीने होने को है लेकिन इनमें से एक भी नमूने की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। इस मामले में नौ एफआईआर भी हुई हैं। रिपोर्ट में नमूने फेल आने पर इनकी धाराएं और बढ़ जातीं। सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि नमूनों की जांच कर जल्द रिपोर्ट देने के लिए लैब में बात की है।
58 फर्म के लाइसेंस निरस्त, 9 एफआईआर
एफएसडीए आयुक्त ने अंतरराज्यीय सिंडिकेट पकड़ने के बाद 58 थोक दवा मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस निरस्त कर दिए थे। इनमें नौ एफआईआर दर्ज भी की गईं। अभी भी चार गोदाम सील हैं और जांच चल रही है। आगरा से दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में तस्करी की जाती थी।