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बेसिक स्कूलों की किताबों में लगी दीमक

Fri, 17 Jul 2015 01:58 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा।
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बेसिक शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही गुरुवार को सामने आई है। परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में नि:शुल्क वितरण के लिए आई किताबों में दीमक लग गई है। बड़ी संख्या में किताबों को नुकसान पहुंचा है। अब यही किताबें बच्चों के लिए स्कूलों में पहुंचाई जा रही हैं।  
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नगर क्षेत्र के स्कूलों में वितरण के लिए न्यू आगरा स्थित प्राथमिक विद्यालय में रखी गई किताबों को दीमक ने नुकसान पहुंचाया है। इसमें कक्षा छह की गणित, मंजरी, कक्षा सात के हमारा इतिहास और नागरिक जीवन आदि किताबें हैं। स्कूल में मौजूद स्टाफ ने बताया कि उनको जिले स्तर से किताबें इसी तरह प्राप्त हुई हैं। किताबों के कई बंडल में दीमक जरूर दिखाई दिए, लेकिन स्कूल में रखरखाव में गड़बड़ी नहीं दिखाई दी। सीलन भी नहीं नजर आ रही थी। इससे साफ जाहिर हो रहा था कि किताबों में दीमक पहले से लगी हुई थी।      
 
‘कुछ किताबों में दीमक लगी पाई गई, बेसिक शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। इस संबंध में सभी खंड शिक्षा अधिकारी और नगर शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि सत्यापित किताबों का तत्काल वितरण कराएं। यदि किताबों का भंडारण या लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।’
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गिरजेश चौधरी, एडी बेसिक



एडी बेसिक ने कराया निरीक्षण
आगरा। मीडिया से किताबों में दीमक लगने की जानकारी प्राप्त होने के बाद एडी बेसिक ने स्कूल का निरीक्षण कराया। निरीक्षण टीम को भी किताबों में दीमक लगी मिली। फोन से एडी बेसिक को जानकारी दी गई। खुद बीएसए ओमकार सिंह ने किताबों की दशा देखी। हालांकि पूछने पर उन्होंने बताया कि एक- दो किताबों में मिट्टी लगी थी।

डीएम के निर्देश पर नहीं हुआ अमल
आगरा। तीन जुलाई को विकास भवन में विकास कार्यों को लेकर हुई समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी पंकज कुमार ने किताब वितरण में ढिलाई पर नाराजगी जताई थी। प्रकाशकों से जिले को प्राप्त किताबों को दो दिन के अंदर स्कूलों में पहुंचाने के निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारी को दिए थे। आदेश पर अमल हुआ होता तो किताबों में दीमक नहीं लगते।

देर से आई और दुरुस्त भी नहीं
आगरा। परिषदीय बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के बैग में नई किताबें एक तो देर से पहुंच रही हैं, वह भी दुरुस्त नहीं। शैक्षिक सत्र अप्रैल से शुरू है। डेढ़ माह बच्चों ने पुरानी किताब से पढ़ाई की। जुलाई मध्य में बच्चों के बस्ते में किताब पहुंच रही है, वह भी दीमक खाई हुई।
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