आगरा। अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल) अमरेंद्र कुमार वर्मा की अदालत ने ठाकुर रंगजी महाराज विराजमान मंदिर (वृंदावन) ट्रस्ट की ओर से दायर नक्शा दुरुस्ती वाद को खारिज कर दिया है।
अदालत ने 29 सितंबर को दिए गए आदेश में स्पष्ट किया है कि पीएसी बटालियन की कब्जे वाली जमीन गाटा संख्या 157 और गाटा संख्या 257 के स्थान में बदलाव करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने राजस्व परिषद के निर्देश पर गाटा संख्या 158 और 155 के बीच स्थित बिना नंबर प्रदर्शित भूखंड की जांच व नियमानुसार आवश्यक विधिक कार्रवाई के लिए पत्रावली तहसीलदार सदर, आगरा को भेज दी है।
बता दें, वृंदावन स्थित मंदिर ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम, 1901 की धारा 28 के तहत यह याचिका दाखिल की थी। ट्रस्ट का कहना है कि खतौनी में दर्ज गाटा संख्या 157 (पार्क व नहर) नक्शे में सड़क से लगे उस स्थान पर होना चाहिए जहां कोई नंबर नहीं लिखा है। ट्रस्ट का तर्क है कि गाटा संख्या 257 को हटाकर वहां 157 लिखा जाना एक लिपिकीय त्रुटि है जिसे ठीक किया जाए।
दूसरी ओर, पीएसी बटालियन आगरा की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) ने पक्ष रखते हुए कहा कि अभिलेखों में गाटा संख्या 157 में आबादी पीएसी और पार्क दर्ज है, जिस पर उनका ही वास्तविक कब्जा है। नगर निगम और पीएसी के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि नक्शे में बदलाव का कोई आधार नहीं है।
राजस्व परिषद के आदेश के बाद हुआ फैसला
मामला इससे पहले उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद (लखनऊ) पहुंचा था, जिसने 30 अप्रैल 2024 को मामले को पुनर्विचार के लिए एडीएम कोर्ट में प्रतिप्रेषित (रिमांड) किया था। राजस्व परिषद ने 1285 फसली और 1331 फसली नक्शों के अध्ययन के बाद पाया कि नई गाटा संख्या 157 पुरानी गाटा संख्या 1 से बनी है और इसे बदलने की जरूरत नहीं है। एडीएम कोर्ट ने राजस्व परिषद के निष्कर्षों और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों से सहमति व्यक्त करते हुए मंदिर ट्रस्ट की याचिका को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने तहसीलदार सदर आगरा को निर्देश दिया है कि नक्शे में 158 और 155 के मध्य छूटे हुए नंबर को अद्यतन व दुरुस्त करने की प्रक्रिया पूरी करें।