मैनपुरी। शहर का प्राचीन श्री भीमसेन महाराज मंदिर का इतिहास तमाम पौराणिक गाथाएं और किंवदंतियां समेटे है। कहा जाता है कि यहां अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने बिठूर जाते समय भगवान भीमसेन की पूजा की थी। महृर्षि मार्कंडेय ने भी भगवान भीमसेन की साधना की थी।
यूं तो मंदिर में प्रत्येक सोमवार को भक्तों का सैलाब उमड़ता है, लेकिन श्रावण मास के सोमवार में तो मेले जैसा नजारा होता है। इस साल कोरोना महामारी का ग्रहण भीमसेन मंदिर पर भी नजर आ रहा है। 25 मार्च से मंदिर के कपाट बंद हैं। जो फिलहाल 20 जुलाई तक बंद रखे जाएंगे।
शहर के मोहल्ला गाड़ीवान में स्थित भगवान भीमसेन का वर्तमान मंदिर तो 12वीं शताब्दी में अपने स्वरूप में आया लेकिन भगवान भीमसेन का विग्रह पौराणिक काल का बताया जाता है। शहर के ईशान कोण में जहां मां शीतला देवी का मंदिर है वहीं आग्नेय कोण में भगवान भीमसेन विराजमान हैं। कहा जाता है कि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच इस पावन नगरी की रक्षा के लिए शिवा और शिव को विराजमान किया गया है।
तीर्थस्थल बटेश्वर की भांति यहां भी भगवान शिव की प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में है। विग्रह में बड़े-बड़े जटा जूट से अलंकृत चंद्रकला को मस्तक पर धारण करने वाले एवं बड़ी-बड़ी मूंछों से सुशोभित शिव का रूपांकन किया गया है। श्री भीमसेन मंदिर के बारे में किवदंती है कि अज्ञातवास के दौरान इच्छु नदी (वर्तमान में ईशन) के किनारे-किनारे बिठूर जाते समय पांडव यहां रुके थे। पांडवों ने भगवान भीमसेन की यहां पूजा अर्चना की थी।
घर पर ही पूजन करें
जिला प्रशासन ने 20 जुलाई तक मंदिर को बंद रखने के आदेश दिए हैं। इसलिए मंदिर बंद है। भक्तों से निवेदन है कि वे घर पर ही भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करें। - साहबलाल तिवारी पुजारी, भीमसेन मंदिर