बज्रनाभ ने बनवाया था पोतरा कुंड
भगवान श्रीकृष्ण ने मंदिर परिसर में मंदिर के प्रवेश से पूर्व स्नान आदि करने के उद्देश्य से एक कुंड का निर्माण भी कराया था। जिसे भी आक्रांता नष्ट नहीं कर सके। कालांतर में इसे बज्रनाथ के प्रपौत्र होने के नाते पौत्र कुंड कहा जाने लगा और बाद में शब्द अपभ्रंश होते हुए अब इसे पोतरा कुंड कहा जाता है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि कुएं और पोतरा कुंड को महाराज वज्रनाभ द्वारा ही बनवाया गया था। चूंकि मंदिर में कुओं का विशेष महत्व होता है। इसलिए यह कुएं मंदिर में बनवाए गए। इसके इतिहास में अनेक साक्ष्य मौजूद हैं। दोनों की गहराई लगभग एक समान लगभग 60-70 फुट है। चूंकि उस समय यमुना यहीं बहती थीं, इसलिए जलस्तर भी कम ही रहा होगा। इतना ही पोतरा कुंड में जल रहता था। पोतरा कुंड का असल नाम प्रपौत्र कुंड था जो बाद में पौत्रा कुंड के नाम से जाना जाने लगा।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान प्रकरण के पक्षकार मनीष यादव का कहना है कि हमने अपने दावे में इतिहास की जानकारी दी है और बताया है कि किस तरह से आक्रांताओं ने मंदिरों को बार-बार तोड़ा है। साथ ही इस स्थान पर जो अवशेष कुएं आदि रह गए हैं उनको अदालत में साक्ष्य के तौर पर पेश करेंगे।