डा. निर्भय सिंह भदौरिया
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शिक्षक स्वस्थ समाज और राष्ट्र निर्माता होता है। ये यूहीं नहीं बोला जाता। तय उम्र के बाद भले ही विद्यालय से सेवानिवृत्त होते हों, लेकिन किसी भी रूप में समाज को शिक्षित करने का सिलसिला आगे बढ़ता ही रहता है। ऐसे ही कई शिक्षक हैं जो सही मायने में शिक्षा का दीप जलाकर नई पीढ़ी की जिंदगी से अंधेरा मिटाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
आगरा के खंदारी निवासी डा. निर्भय सिंह भदौरिया को सेवानिवृत्ति हुए लगभग 14 साल गुजर गए लेकिन स्कूल में पढ़ाना नहीं छोड़ा। आरबीएस इंटर कालेज में तय समय पर वह चॉक और डस्टर के साथ पहुंचते हैं। जानकर हैरत होगी कि सेवानिवृत्त होने से अब तक वे पूरी तरह से नि:शुल्क पढ़ा रहे हैं। इसके एवज में एक रुपया तक नहीं लेते।
अनुशासन और नियमित कक्षा ही उनकी पहचान है। डा. भदौरिया बताते हैं कि तीन बेटे हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। रिटायरमेंट के बाद मन नहीं लगता, ऐसे में उन्होंने पूर्व की भांति पढ़ाना जारी रखा। वह कहते हैं कि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता, शिक्षित करना ही शिक्षक का धर्म है, वही निभा रहा हूं।